देवभूमि का वो सिद्धपीठ जहां पूरी होती है हर मन्नत, खेत में मिली मूर्ति ने कर दिया ऐसा चमत्
देवभूमि का वो सिद्धपीठ जहां पूरी होती है हर मन्नत, खेत में मिली थी मूर्ति
Last Updated:
Maa Kuteti Devi Temple: देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर श्रद्धा और चमत्कार का अद्भुत संगम माना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है. खेत में अचानक मिली देवी की प्राचीन मूर्ति ने इस स्थान को दिव्य शक्ति से भर दिया और देखते ही देखते यह छोटा सा स्थल आस्था का बड़ा केंद्र बन गया, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं…
Maa Kuteti Devi Temple: देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर ना केवल स्थानीय लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति भी कराता है. मान्यता है कि मां कुटेटी देवी से मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. उत्तरकाशी की सुरम्य वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित मां कुटेटी देवी मंदिर श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का पावन केंद्र है. मां आदिशक्ति को समर्पित यह सिद्धपीठ अपने दिव्य वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है. आइए जानते हैं देवभूमि के सिद्धपीठ के इस खास मंदिर के बारे में…
श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति
मां कुटेटी देवी मंदिर ना केवल एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, बल्कि एक ऐसा सिद्धपीठ भी है, जहां का शांत वातावरण और दिव्य ऊर्जा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुटेटी देवी का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य के काल तथा राजस्थान के कोटा राजघराने की अनन्य भक्ति से जुड़ा हुआ है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, नवविवाहित दंपति यहां संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं.
मंदिर से जुड़ी मान्यता
माता के यहां विराजमान होने से संबंधित एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि माता अपने एक भक्त की प्रार्थना पर राजस्थान से उत्तरकाशी पहुंचीं और इंद्रावती नदी के समीप स्थित पहाड़ी पर विराजमान हुईं. किंवदंती के अनुसार, राजस्थान के कोटा के एक महाराजा गंगोत्री यात्रा पर आए थे. यात्रा के दौरान उनका धन से भरा बैग खो गया. उन्होंने उत्तरकाशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रार्थना की कि अगर उनका बैग मिल गया तो वे अपनी पुत्री का विवाह स्थानीय युवक से करेंगे. कुछ समय बाद उनका बैग मिल गया और उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुत्री का विवाह एक स्थानीय युवक से कर दिया.
श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र
हालांकि, राजकुमारी इस बात से दुखी थीं कि उनकी कुलदेवी मां कुटेटी उनसे दूर रह गई हैं. मान्यता है कि माता ने स्वप्न में राजकुमारी को दर्शन देकर कहा कि वह उनके खेत में मिलेंगी. अगले दिन राजकुमारी को इंद्रावती नदी के समीप स्थित खेत में देवी के बताए अनुसार तीन पत्थर मिले. इसके बाद ग्रामीणों ने उसी स्थान पर मां कुटेटी देवी मंदिर का निर्माण कराया, जो आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
About the Author

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


