शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है? वे कैसे करते हैं न्याय, जानें उपाय
शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है? वे कैसे करते हैं न्याय, जानें
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Shani Dev ko Nyay ka Devta: शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है क्योंकि वे सबको उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं, चाहें वे देवी-देवता, यक्ष, गंधव, असुर, राक्षस हों या फिर मनुष्य. वे लोगों को दंडित करके धर्म के मार्ग पर लाने का प्रयास करते हैं. आइए जानते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय.
शनिदेव लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. (Photo: AI)
Shani Dev ko Nyay ka Devta: शनिदेव नवग्रहों में प्रमुख स्थान रखते हैं. उनकी जिस पर वक्र दृष्टि होती है, उसका बुरा वक्त शुरू हो जाता है. उसमें वे लोगों को किए गए कर्मों के आधार पर फल देते हैं. जो व्यक्ति जैसा कर्म किया होता है, उसे वैसा फल प्रदान करते हैं. यदि आपने दूसरों को दुख दिया है, चोरी, घृणा, धोखा करते रहे हैं तो आप सजा के भागी बनते हैं, जो सदकर्म करते हैं, उनको शुभ फल प्राप्त होते हैं. इस वजह से शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है.
शनिदेव को कर्मों का न्यायधीश क्यों माना जाता है?
जब शनिदेव का जन्म हुआ तो वे श्याम वर्ण के थे, उनको देखकर पिता सूर्य देव क्रोधित हो गए. फिर उनकी माता छाया के चरित्र पर सवाल उठाने लगे. उनके मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर छाया ने उनको कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया. वहीं जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे काफी क्रोधित हो गए. उन्होंने कठोर तप से भगवान शिव को प्रसन्न किया. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उनको ग्रहों में स्थान दिया और कहा कि संसार आपको न्याय के देवता के रूप में पूजेगा. तब से शनिदेव न्याय के देवता कहलाने लगे.
शनिदेव का न्याय देने का तरीका क्या है?
शनिदेव को कर्मफलदाता भी कहा जाता है. जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल देते हैं. हर व्यक्ति के जीवन में शनिदेव कम से कम दोबार जरूर आते हैं. एक साढ़ेसाती और दूसरा ढैय्या के रूप में. साढ़ेसाती का समय साढ़े सात साल और ढैय्या ढाई साल. जब शनि का समय आता है तो वे व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देते हैं, दुष्टों को दंडित करते हैं और सज्जनों पर कृपा करते हैं. साढ़ेसाती और ढैय्या में व्यक्ति के विकास की गति धीमी हो जाती है, कोर्ट केस, बीमारी, दुर्घटना आदि से दुष्ट लोग परेशान होते हैं. वे लोगों को दंडित करके धर्म के मार्ग पर लाते हैं.
शनिदेव किसी से भेदभाव नहीं करते हैं. चाहे देवी या देवता हों, राजा हो या फिर रंक, सबको उसके कार्यों के अनुसार फल देते हैं. रावण पर जब शनि की दृष्टि पड़ी तो उसके पूरे वंश का नाश हो गया. राजा हरिशचंद्र पर शनि की दृष्टि हुई तो उनका सारा राजपाट छिन गया, वो राजा से रंक हो गए.
शनिदेव को प्रसन्न करने के सरल उपाय
- शनिवार के दिन व्रत रखकर शनिदेव की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं. इससे उनके कष्टों में कमी आती है.
- जो लोग गरीब, असहाय, मरीज लोगों की सेवा और मदद करते हैं, उन पर भी शनिदेव खुश रहते हैं.
- शनिवार के दिन लोहा, काली उड़द, काला तिल, कंबल, काला छाता, जूते, चप्पल, तेल आदि का दान करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं.
- शनिदेव को खुश करने के लिए आप शनि स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं.
- शनिवार को छाया दान करने से भी शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


