एकादशी पर चावल तो सबको पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इन 5 तिथियों में नहीं बनती रोटी

एकादशी पर चावल तो सबको पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इन 5 तिथियों में नहीं बनती रोटी

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Vastu Tips for Roti Making: सनातन परंपरा और वास्तु शास्त्र में भोजन बनाने और खाने को लेकर कई जरूरी नियम बताए गए हैं. हमारे धार्मिक ग्रंथों में कुछ ऐसी विशेष तिथियां बताई गई हैं, जिनमें घर की रसोई में नियमित रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता. एकादशी, महाशिवरात्रि से लेकर अमावस्या और पूर्णिमा जैसी इन खास तिथियों पर सात्विक रहने और फलाहार करने की परंपरा है. मान्यता है कि इन दिनों खानपान में संयम बरतने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का वास होता है. आइए ज्योतिषी से जानते हैं कि आखिर हमें किन दिनों में रसोई में रोटी बनाने से परहेज करना चाहिए.

ऋषिकेश: भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक पवित्र कर्म माना गया है. यही कारण है कि रसोईघर को घर का सबसे महत्वपूर्ण और शुभ स्थान माना जाता है. सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र में भोजन बनाने से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका पालन आज भी बड़ी संख्या में लोग करते हैं. विशेष रूप से कुछ तिथियां ऐसी मानी जाती हैं, जिन पर रोटी या अन्य खाद्य पदार्थ बनाने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि इन दिनों आध्यात्मिक साधना, व्रत और पूजा-पाठ को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए खानपान में संयम बरतने की सलाह दी जाती है.

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी उन प्रमुख तिथियों में शामिल है, जब कई लोग अन्न का सेवन नहीं करते. भगवान विष्णु को समर्पित इस दिन व्रत रखने की परंपरा है. मान्यता है कि एकादशी पर अनाज से बनी रोटी या अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने के बजाय फलाहार करना अधिक शुभ माना जाता है.

महाशिवरात्रि  पर रोटी बनाने पर मनाही
इसी तरह महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है. इस दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और दिनभर पूजा-अर्चना में समय बिताते हैं. मान्यता है कि इस दिन सादा और सात्विक आहार या केवल फलाहार ग्रहण करना अधिक लाभकारी होता है. इसलिए कई घरों में नियमित रोटी नहीं बनाई जाती.

अमावस्या को भी विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है. हिंदू धर्म में यह दिन पितरों के स्मरण और तर्पण से जुड़ा माना जाता है. कुछ क्षेत्रों में मान्यता है कि अमावस्या के दिन भोजन बनाने और खाने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. कई लोग इस दिन सादा भोजन करते हैं, जबकि कुछ धार्मिक कारणों से कुछ विशेष खाद्य पदार्थ बनाने से परहेज करते हैं.

श्राद्ध पक्ष के दौरान भी खानपान को लेकर कई नियमों का पालन किया जाता है. इन दिनों को पूर्वजों की स्मृति और सम्मान के लिए समर्पित माना जाता है. कई लोग तामसिक भोजन से दूरी बनाते हैं और केवल सात्विक भोजन तैयार करते हैं. कुछ स्थानों पर रोटी बनाने या सामान्य भोजन की बजाय विशेष प्रकार के भोग और प्रसाद तैयार करने की परंपरा भी देखने को मिलती है.

पूर्णिमा पर रोटी बनाने को लेकर नियम
इसके अलावा पूर्णिमा की तिथि को भी आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है. कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार पूर्णिमा पर सात्विक जीवनशैली अपनाने और भोजन में सादगी रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसी कारण दिन रोटी बनाना शुभ नहीं माना जाता.

वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में भोजन बनाते समय स्वच्छता, सकारात्मक सोच और नियमों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि जिस भाव से भोजन तैयार किया जाता है, उसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है. इसलिए विशेष तिथियों पर संयम, पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने की परंपरा विकसित हुई.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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