'रात की शादियां राक्षसी परंपरा…', देवकीनंदन ठाकुर ने गोधूलि बेला को क्यों बताया विवाह के
‘रात की शादियां राक्षसी परंपरा…’, देवकीनंदन ठाकुर से जानें उत्तम समय क्या है
Last Updated:
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह की परंपरा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाह के लिए गोधूलि बेला सबसे उत्तम मानी गई है. उनका मानना है कि प्राचीन परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं में भी इस समय को शुभ बताया गया है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आधुनिक सुविधाओं और दिखावे के कारण रात के विवाह का चलन बढ़ा है, जो परंपरागत दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता…
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह, शादियों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि विवाह के लिए ‘गोधूलि बेला’ सबसे शुभ और उत्तम समय है. भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का मिलन माना जाता है. यही कारण है कि विवाह के लिए शुभ मुहूर्त और विशेष समय का चयन किया जाता है. इन्हीं शुभ समयों में गोधूलि बेला का विशेष महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं कब होता है गोधूलि बेला का समय और इस समय को क्यों माना गया है महत्वपूर्ण…
गोधूलि बेला विवाह के लिए सबसे शुभ समय
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार समय का विभाजन देवताओं, पितरों और दैत्यों के समय में किया गया है. रात का समय दैत्यों का माना जाता है, इसलिए हिंदू समाज को रात में विवाह करने से बचना चाहिए. दैत्यों के समय में विवाह करके दैवीय और आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि प्राचीन भारतीय परंपरा में ‘गोधूलि बेला’ को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय माना जाता था. उस समय विवाह के सभी प्रमुख संस्कार और फेरे दिन में ही संपन्न होते थे.
इसलिए रात में किए जाते थे विवाह
देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि मुगल आक्रांताओं के दौर में जब बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर खतरा मंडराने लगा था, तब मजबूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों ने रात के समय छिपकर विवाह करना शुरू किया. धीरे-धीरे यह एक परंपरा का रूप बन गई. उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वैसा कोई खतरा नहीं है, इसलिए समाज को शोर-शराबे और अनावश्यक दिखावे से दूर रहकर फिर से दिन में विवाह करने की पवित्र परंपरा की ओर लौटना चाहिए.
16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार
शादियों में मद्यपान के सेवन को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है. ऐसे पवित्र अवसर पर मद्यपान करना अत्यंत दूषित विषय है. इसका नकारात्मक प्रभाव केवल परिवार पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है. विवाह को जितना अधिक पवित्र रखा जाएगा, समाज उतना ही स्वस्थ और संस्कारित बनेगा.
कब होता है गोधूलि बेला का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त से ठीक पहले का समय, जब गायें चरागाह से लौटती हैं और उनके खुरों से उड़ने वाली धूल वातावरण में फैलती है, उसे गोधूलि बेला कहा जाता है. शास्त्रों में इस समय को अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना गया है. मान्यता है कि इस बेला में देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है.
स्वयं में शुभ माना जाता है गोधूलि बेला
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गोधूलि बेला में विवाह करने से कई बार विस्तृत मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं पड़ती. यह समय स्वयं में शुभ माना जाता है और दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि तथा सौहार्द लाने वाला बताया गया है. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी गोधूलि बेला में विवाह की परंपरा देखने को मिलती है. धार्मिक ग्रंथों में भी इस समय को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है. माना जाता है कि गोधूलि बेला में संपन्न होने वाले वैवाहिक संस्कार नवदंपति के जीवन में स्थिरता, प्रेम और पारिवारिक सुख लेकर आते हैं.
About the Author

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


