भगवान राम की विजय से जुड़ा है खेजड़ी वृक्ष, दशहरे पर भी होता है विशेष पूजन
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Khejri Tree Significance: राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी, जिसे शमी भी कहा जाता है, धर्म और आस्था में विशेष महत्व रखता है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका विजय से पहले इसकी पूजा की थी. यह वृक्ष भगवान गणेश और शनि देव को भी प्रिय माना जाता है. किसानों के लिए खेजड़ी जीवनरेखा की तरह है क्योंकि इसके पत्ते पशुओं का चारा बनते हैं और सांगरी अतिरिक्त आय का साधन है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे देव स्वरूप मानकर पूजा की जाती है.
Khejri Tree Significance: राजस्थान की तपती धरती पर हरियाली और जीवन का प्रतीक माना जाने वाला खेजड़ी वृक्ष केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. राजस्थान का राज्य वृक्ष कहलाने वाला खेजड़ी पेड़ ग्रामीण जीवन, परंपरा और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है. संस्कृत में इसे ‘शमी’ कहा जाता है, जबकि मारवाड़ क्षेत्र में इसे तुलसी के समान पूजनीय माना जाता है. दूर से देखने पर यह सामान्य पेड़ जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसकी धार्मिक और सामाजिक महत्ता इसे खास बनाती है. गांवों में आज भी लोग खेजड़ी वृक्ष को देवता का स्वरूप मानकर प्रणाम करते हैं और इसकी पूजा करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने लंका विजय से पहले खेजड़ी यानी शमी वृक्ष की पूजा की थी और आशीर्वाद प्राप्त किया था. तभी से इसे विजय, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. दशहरा पर्व पर भी शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है. मान्यता यह भी है कि यह वृक्ष भगवान गणेश और शनि देव को अत्यंत प्रिय है. लोग मानते हैं कि इसके तनों, जड़ों और पत्तों में देवी-देवताओं का वास होता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेजड़ी वृक्ष को काटना अशुभ माना जाता है और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
किसानों के लिए जीवनरेखा है खेजड़ी
जालोर के किसान मुरारदान बारहठ ने बताया कि खेजड़ी वृक्ष किसानों के लिए किसी जीवनरेखा से कम नहीं है. यह पेड़ भीषण गर्मी और सूखे में भी हरा-भरा बना रहता है, जिससे खेतों में नमी बनी रहती है और फसलों को फायदा मिलता है. इसके पत्ते पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करते हैं, जिससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है. वहीं इसकी फलियां, जिन्हें सांगरी कहा जाता है, किसानों की आय का मजबूत साधन मानी जाती हैं. राजस्थान की प्रसिद्ध पंचकूट सब्जी में भी सांगरी का उपयोग किया जाता है.
आस्था के साथ संरक्षण का संदेश
खेजड़ी वृक्ष केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी बड़ा उदाहरण है. यह पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में मिट्टी को सुरक्षित रखने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. ग्रामीणों का मानना है कि जिस गांव और खेत में खेजड़ी का पेड़ होता है वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है. यही कारण है कि राजस्थान में इस वृक्ष को केवल पेड़ नहीं बल्कि संस्कृति और जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें


