थाली में क्यों नहीं परोसनी चाहिए 3 रोटी? जानिए भोजन से जुड़े वास्तु नियम
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वास्तु शास्त्र के अनुसार भोजन करने के भी कुछ खास नियम बताए गए हैं. बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के मुताबिक थाली में एक साथ तीन रोटी नहीं परोसनी चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करना शुभ माना गया है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
फरीदाबाद: भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं होता बल्कि इसका सीधा असर घर की सुख-समृद्धि और परिवार की ऊर्जा पर भी पड़ता है. हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा से खाने-पीने के तरीकों को लेकर कुछ नियम बताते आए हैं. कौन सी दिशा में बैठकर खाना चाहिए… थाली में क्या पहले परोसना चाहिए और किस तरह भोजन करना चाहिए…इन सभी बातों का वास्तु शास्त्र में खास महत्व माना गया है. इन्हीं नियमों में एक बात अक्सर सुनने को मिलती है थाली में तीन रोटी एक साथ नहीं परोसनी चाहिए. आखिर इसके पीछे क्या वजह है इसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं.
भोजन परोसने का नियम
लोकल 18 से बातचीत करते हुए बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं भोजन हमेशा साफ और सही थाली में करना चाहिए. कांसे या स्टील की थाली सबसे उत्तम मानी जाती है. टूटी या चटकी हुई थाली में भोजन करना वास्तु दोष माना जाता है. थाली हमेशा समतल जगह पर रखनी चाहिए और यदि संभव हो तो जमीन पर बैठकर भोजन करना सबसे अच्छा रहता है.
थाली में तीन रोटी एक साथ न रखें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं भोजन परोसने का भी एक तरीका होता है. सबसे पहले थाली में चावल रखना चाहिए क्योंकि चावल को समृद्धि का प्रतीक माना गया है. इसके बाद एक, दो या चार रोटी परोसी जा सकती हैं. लेकिन थाली में तीन रोटी एक साथ नहीं रखनी चाहिए. तीन रोटी त्रिकोणीय स्थिति बनाती हैं जिससे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है. यही नकारात्मकता घर में अशांति, कलह और आर्थिक रुकावट का कारण बन सकती है.
भोजन किस दिशा में करें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं भोजन करते समय दिशा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है. अगर पूर्व दिशा संभव न हो तो उत्तर दिशा की तरफ बैठकर खाना चाहिए. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे यम की दिशा माना गया है. इसलिए भोजन के लिए उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है.
भोजन करते वक्त किन बातों का रखें ध्यान
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं थाली में नमक और अचार रखने का भी सही स्थान होता है. थाली के दाहिने हिस्से में नमक और हरी मिर्च रखनी चाहिए, जबकि बाईं तरफ अचार या दूसरी चीजें रखनी चाहिए. भोजन करते समय मन शांत और प्रसन्न होना चाहिए. खाने के दौरान लड़ाई-झगड़ा, ज्यादा बातें या मोबाइल और टीवी देखना ठीक नहीं माना जाता.
अन्न ब्रह्म का स्वरूप
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है. इसलिए भोजन हमेशा आदर और प्रेम से करना चाहिए. हर कौर को अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए, ताकि भोजन सही तरीके से पचे और शरीर को पूरा लाभ मिले. अगर इंसान नियम और श्रद्धा के साथ भोजन करता है तो घर में मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें


