क्या आप भी पहन रहे हैं मोती? इन 5 रत्नों के साथ भूलकर भी न करें ये बड़ी गलती
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Moti Ratna Tips: रत्न सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं होते, ज्योतिष में इन्हें ग्रहों की ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. कई लोग मानसिक शांति, रिश्तों में मिठास और जीवन में स्थिरता पाने के लिए मोती धारण करते हैं. कहा जाता है कि मोती चंद्रमा का रत्न है और इसका असर सीधे मन, भावनाओं और सोच पर पड़ता है, लेकिन ज्योतिषाचार्यों की मानें तो मोती हर किसी के लिए शुभ नहीं होता और इसे गलत रत्नों के साथ पहनना भारी पड़ सकता है. कई बार लोग बिना कुंडली देखे अलग-अलग रत्न पहन लेते हैं, जिसका असर उल्टा दिखाई देने लगता है. घर में तनाव बढ़ना, फैसलों में भ्रम, नींद की परेशानी और रिश्तों में दूरी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. ऐसे में मोती पहनने से पहले उसके सही नियम और किन रत्नों से दूरी रखनी चाहिए, यह जानना बेहद जरूरी माना जाता है.
मोती का ज्योतिष में क्या महत्व है रत्न शास्त्र में मोती को चंद्र ग्रह का प्रतिनिधि माना गया है. चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, मानसिक संतुलन और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें अक्सर बेचैनी, डर, तनाव और आत्मविश्वास की कमी महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों को ज्योतिषी मोती पहनने की सलाह देते हैं. कहा जाता है कि सही तरीके से धारण किया गया मोती व्यक्ति के स्वभाव को शांत बनाता है. गुस्सा कम होता है और मन में सकारात्मक सोच बढ़ती है. यही वजह है कि कई लोग इंटरव्यू, बिजनेस मीटिंग या वैवाहिक जीवन में शांति बनाए रखने के लिए भी मोती धारण करते हैं.

मोती पहनने का सही तरीका सोमवार को पहनना माना जाता है शुभ ज्योतिष के अनुसार मोती धारण करने के लिए सोमवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है. इसे सुबह स्नान के बाद पहनना शुभ बताया जाता है. मोती को चांदी की अंगूठी में पहनना ज्यादा लाभकारी माना जाता है क्योंकि चांदी भी चंद्रमा से जुड़ी धातु मानी जाती है.

मंत्र जाप के बिना अधूरा माना जाता है उपाय मोती पहनने से पहले उसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करने की परंपरा है. इसके बाद “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है. मान्यता है कि इससे रत्न की सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है.
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छोटी उंगली में पहनें ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मोती को दाएं हाथ की छोटी उंगली में पहनना शुभ माना जाता है. हालांकि कई मामलों में कुंडली के अनुसार तरीका अलग भी हो सकता है.

भूलकर भी साथ न पहनें ये 5 रत्न 1. नीलम के साथ मोती मोती और नीलम का मेल ज्योतिष में सही नहीं माना जाता. नीलम शनि ग्रह का रत्न है जबकि मोती चंद्रमा से जुड़ा होता है. दोनों ग्रहों की ऊर्जा अलग मानी जाती है. कहा जाता है कि इन्हें साथ पहनने से मानसिक दबाव, अचानक नुकसान और जीवन में उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं.

2. हीरे के साथ मोती हीरा शुक्र ग्रह का रत्न माना जाता है. ज्योतिष में शुक्र और चंद्रमा की ऊर्जा कई बार विपरीत असर देने लगती है. ऐसा माना जाता है कि मोती और हीरा साथ पहनने से पति-पत्नी के बीच गलतफहमियां बढ़ सकती हैं. कई लोग रिश्तों में दूरी और भावनात्मक तनाव महसूस करने लगते हैं.

3. गोमेद के साथ मोती गोमेद राहु ग्रह से जुड़ा रत्न है. राहु को भ्रम और मानसिक अस्थिरता का कारक माना जाता है. ऐसे में मोती और गोमेद का संयोजन मन में डर, घबराहट और नकारात्मक विचार बढ़ा सकता है. ज्योतिषी बिना सलाह इसे साथ पहनने से बचने की सलाह देते हैं.

4. पन्ना के साथ मोती पन्ना बुध ग्रह का रत्न माना जाता है. कई बार बुध और चंद्रमा का मेल सोच और भावनाओं में असंतुलन पैदा कर सकता है. इससे व्यक्ति फैसले लेने में भ्रमित रहने लगता है. काम पर फोकस कम हो सकता है और आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ सकता है.

5. लहसुनिया के साथ मोती लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है. इसे रहस्यमयी और तेज असर वाला रत्न माना जाता है. मोती के साथ इसे पहनने से व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर महसूस कर सकता है. कई बार एकाग्रता कम हो जाती है और छोटी-छोटी बातों पर चिंता बढ़ने लगती है.

बिना कुंडली रत्न पहनना क्यों पड़ सकता है भारी आजकल फैशन या दूसरों की सलाह पर रत्न पहनने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, लेकिन ज्योतिष में हर रत्न हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं माना जाता. कई बार गलत रत्न पहनने से फायदा मिलने की बजाय परेशानियां बढ़ने लगती हैं. इसलिए किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से कुंडली दिखाना जरूरी माना जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


