Adhik Maas आज से शुरू: जानिए कैसे बनता है पुरुषोत्तम मास? जानें क्या करें, क्या ना करें और

Adhik Maas आज से शुरू: जानिए कैसे बनता है पुरुषोत्तम मास? जानें क्या करें, क्या ना करें और

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Adhik Maas आज से शुरू, जानें कैसे बनता यह मास? जानें क्या करें, क्या ना करें

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Adhik Maas 2026: आज से पंचांग में अधिकमास की शुरुआत हो गई है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ देखा जाता है. सामान्य तौर पर हर 3 वर्ष में आने वाला यह अतिरिक्त मास सनातन परंपरा में आत्मचिंतन, साधना, दान-पुण्य और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस महीने में की गई भक्ति और सत्कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.

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Adhik Maas 2026: आज से अधिकमास की शुरुआत हो रही है और 15 जून को इसका समापन होगा, यह दो महीने का होने वाला दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास है. हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब किसी चंद्र मास में सूर्य का संक्रांति परिवर्तन नहीं होता, तब उस अतिरिक्त महीने को अधिकमास कहा जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बताया गया है. ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में अधिकमास को आत्मशुद्धि, भक्ति और पुण्य कमाने का श्रेष्ठ समय माना गया है.

कैसे बनता है अधिकमास?
हिंदू पंचांग चंद्र और सूर्य की गति पर आधारित होता है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. यही अंतर हर तीन साल में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है. इस संतुलन को बनाए रखने के लिए हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस मास को भगवान विष्णु ने अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ देकर विशेष महत्व प्रदान किया था. इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ और भक्ति करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है.

अधिकमास में क्या करें?
अधिकमास के दौरान धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक गतिविधियों को विशेष महत्व दिया गया है. इस महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और राम नाम का जाप करना शुभ माना जाता है.

  • प्रतिदिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें.
  • गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
  • जरूरतमंदों को दान करें और गरीबों की सहायता करें.
  • व्रत, भजन-कीर्तन और सत्संग में भाग लें.
  • तुलसी पूजा और दीपदान करना भी शुभ माना गया है.

अधिकमास में क्या ना करें?
अधिकमास को सांसारिक सुखों से दूरी बनाकर भक्ति और साधना का समय माना गया है। इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

  • विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते.
  • विवाद, क्रोध और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए.
  • तामसिक भोजन और नशे से बचना शुभ माना गया है.
  • किसी का अपमान या अनादर करने से बचें.
  • झूठ और गलत कार्यों से दूरी बनाए रखें.

अधिकमास में किन चीजों का करें दान?
अधिकमास में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है. इस दौरान अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है. साथ ही भगवान नारायण की कृपा प्राप्त होती है और सभी ग्रहों के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है.

  • गेहूं, चावल और दाल का दान करें.
  • पीले वस्त्र, फल और घी दान करना लाभकारी माना गया है.
  • गरीबों को भोजन कराना पुण्यदायी माना जाता है.
  • धार्मिक पुस्तकों और जल से भरे पात्र का दान भी शुभ माना गया है.

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Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



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