भीष्म पितामह की वो सबसे बड़ी गलती, जिससे दुर्योधन समेत 100 कौरवों का हो गया सर्वनाश!

भीष्म पितामह की वो सबसे बड़ी गलती, जिससे दुर्योधन समेत 100 कौरवों का हो गया सर्वनाश!

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भीष्म पितामह की वो गलती, जिससे दुर्योधन समेत 100 कौरवों का हो गया सर्वनाश!

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Bhishma Pitamah Biggest Mistake: भीष्म पितामह महाभारत के सबसे शक्तिशाली किरदार हैं. अपनी प्रतिज्ञा, शक्ति और शौर्य के लिए वे लोक​प्रिय थे. लेकिन क्या उनकी एक गलती की वजह से दुर्योधन समेत उसके 100 भाइयों का सर्वनाश हो गया? इसके बारे में कुछ जगहों पर लोककथा है.

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पितामह भीष्म की गलती से हुआ कौरवों का सर्वनाश? (Photo: AI)

Bhishma Pitamah Biggest Mistake: महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार बेहद ही शक्तिशाली है. गंगा पुत्र भीष्म की प्रतीज्ञा हो या फिर उनकी वीरता के किस्से, उनके समान कोई दूसरा हस्तिनापुर में नहीं था. वे हस्तिनापुर के राज सिंहासन की सेवा के प्रति वचनबद्ध थे. इसकी वजह से उन्होंने कई युद्ध लड़े. लेकिन उन्होंने इस दौरान एक ऐसी गलती की, जिसकी वजह से दुर्योधन समेत 100 कौरवों का सर्वनाश हो गया. वो गलती धृतराष्ट्र और गांधारी के विवाह के बाद की है.

गांधारी की कुंडली में था वैधव्य योग

गांधारी गांधार नरेश सुबाल की पुत्री थीं. उनका विवाह धृतराष्ट्र से हुआ था. उनको जब पता चला कि धृतराष्ट्र दृष्टिहीन हैं तो उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी. विवाह के बाद पितामह भीष्म को पता चला कि गांधारी की कुंडली में वैधव्य योग है. ज्योति​षाचार्यों ने बताया कि इस वजह से गांधारी के पहले पति की असमय मृत्यु हो जाएगी.

इस अशुभ योग के दुष्प्रभाव से बचने के लिए राजा सुबाल ने गांधारी का विवाह एक बकरे से कराया. बाद में उस बकरे की बलि दे दी गई, ताकि उस अशुभ योग का दुष्प्रभाव खत्म हो जाए.

नाराज हो गए पितामह भीष्म

गांधारी के बकरे से विवाह और वैधव्य योग की बात छिपाने से पितामह भीष्म बहुत क्रोधित हो गए. उन्होंने इसे हस्तिनापुर के साथ धोखा माना. हस्तिनापुर की सेवा के प्रण ने उनको कठोर कदम उठाने पर विवश कर दिया. उन्होंने गांधार नरेश सुबाल और उनके 100 पुत्रों को हस्तिनापुर आमंत्रित किया.

गांधार नरेश को पुत्रों समेत जेल में डाला

गुस्से में पितामह भीष्म ने गांधार नरेश सुबाल और उनके 100 पुत्रों को जेल में बंद कर दिया. यह बात गांधार नरेश को अच्छी नहीं लगी. और यही घटना भीष्म की बड़ी गलती भी थी. य​हीं पर गांधार नरेश के छोटे पुत्र शकुनि ने कौरवों के सर्वनाश की प्रतिज्ञा ली. शकुनि ने महाभारत के युद्ध की पटकथा लिखी और दुर्योधन समेत 100 कौरवों का अंत हो गया. इस युद्ध में शकुनि भी मारा गया.

हकीकत या फसाना?

​गांधार नरेश सुबाल और उनके 100 पुत्रों को जेल में डालने की घटना हकीकत है या फिर फसाना? वेद व्यास रचित महाभारत में इस घटना का वर्णन नहीं है. शकुनि के चरित्र को और प्रभावशाली बनाने के लिए लोक नाटकों, उपन्यास और कहानी में ऐसी बातें जोड़ दी गईं.

जब पितामह भीष्म ने गांधारी से धृतराष्ट्र के विवाह का प्रस्ताव रखा था, तो राजा सुबल उनके दृष्टिहीन होने की वजह से असमंजस में थे. लेकिन भीष्म के कुल और हस्तिनापुर को देखते हुए तैयार हो गए. विवाह के बाद कोई युद्ध या राजा सुबाल को बंदी बनाने की घटना ​का जिक्र महाभारत में नहीं है. गांधारी से प्रेम की वजह से शकुनि हस्तिनापुर में रुक गया था.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें

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