जीवन में टूट पड़ा है दुखों का पहाड़, तो जानें सुखी होने का सबसे आसान उपाय
Art Of Living Happy Life: आज के समय में किसी व्यक्ति से पूछें कि क्या तुम सुखी हो? तो वह स्पष्ट उत्तर न देकर अपनी परेशानियों और कष्टों की गिनती शुरू कर देता है. कोई इसलिए सुखी नहीं है कि वह नया कपड़ा नहीं पहना है, तो कोई घूमने नहीं जा पा रहा है, तो किसी के मित्र का प्रमोशन हो गया है, उसका नहीं हुआ, किसी का बेटा ज्यादा काबिल है उसके बेटे से, तो कोई मोटा है, कोई ज्यादा पतला है, कोई नाटा है तो कोई काला है तो कोई सुंदर नहीं है. किसी के पास बाइक नहीं है, तो कोई कार के लिए रो रहा है, कोई स्वस्थ्य नहीं है, तो कोई फिट होने के लिए परेशान है. बेटी बात नहीं मानती, तो किसी के पास धन नहीं है, तो कोई अमीर न बनने की वजह से दुखी है. सबके पास दुखी होने की अपनी ही वजहें हैं. इससे अधिक और भी कई वजहें हो सकती हैं. हालांकि कुछ लोगों के जीवन में वाकई में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो, ऐसे में सुखी कैसे रहा जाए?
सुखी होने का उपाय
महाभारत के विद्धान व्यक्तियों में शामिल नीति कुशल विदुर जी ने व्यक्ति को सुखी रहने के लिए कुछ उपाय बताए हैं, यदि आप उनका पालन करते हैं तो निश्चित रूप से सुखी रह सकते हैं. उनके सुझाव सुनने या पढ़ने में आसान लगेंगे, लेकिन करना कठिन हो सकता है.
विदुर जी कहते हैं कि हर व्यक्ति के पास एक बुद्धि है, वह उस बुद्धि से कर्तव्य और अकर्तव्य के बीच का निर्णय कर ले. फिर वे चार गुणों साम, दाम, दंड और भेद से तीन लोगों शत्रु, मित्र और उदासीन को अपने वश में कर लें.
फिर आप अपनी 5 इंद्रियों (आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा यानि अपनी दृष्टि, श्रवण, गंध, स्वाद और स्पर्श) को वश में कर लें. उसके बाद 6 गुणों के बारे में जान लें. ये 6 गुण हैं संधि, विग्रह, यान, आसन, द्वैधीभाव और समाश्रयरूप.
संधि का अर्थ समझौता, विग्रह दुश्मनी, कलह और युद्ध है, यान का मतलब अभियान या यात्रा से है, आसन का अर्थ स्थान, पद या स्थिति है, द्वैधीभाव का अर्थ है दोमुंही नीति या दोहरा आचरण और समाश्रयरूप का अर्थ दूसरों का सहारा या आश्रय लेना है.
उन 6 गुणों को जानकर 7 चीजों स्त्री, जुआ, शिकार, मदिरा, कठोर वचन, दंड की कठोरता और अन्याय से धन कमाने का त्याग कर दें. जो लोग यह कर पाते हैं, वे ही सुखी रहते हैं.
आसान शब्दों में समझें तो जो व्यक्ति अपने ज्ञान से सही और गलत कर्म का निर्णय करता है, अपने कमजोरियों पर विजय पा लेता है, साम, दाम, दंड और भेद से सबको वश में रखता है, जब 6 गुणों यानि परिस्थिति के अनुसार, कब समझौता करना है, कब युद्ध जरूरी है, लक्ष्य हासिल करने के लिए अभियान कब चलाना है, अपने काम की सफलता के लिए दोहरी नीति का ज्ञान और विपत्ति में दूसरों का सहारा या आश्रय लेना जानता है, 7 अवगुणों का त्याग कर देता है, वही सुखी है.


