आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिय पी की, जानें अर्थ और महत्व

आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिय पी की, जानें अर्थ और महत्व

Aarti Shri Ramayan Ji Ki Lyrics: रामायण में भगवान विष्णु के रामावतार की महिमा का वर्णन है. लंका के राजा रावण के पापों के अंत के लिए त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने मनुष्य रूप में जन्म​ ​लिया. राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में भगवान राम ने जन्म लिया. उनका सीता जी से विवाह किया. सीता हरण से रावण के वध की पृष्ठभूम बनी और रावण अपने कुल सहित मारा गया. भगवान राम को मर्यादापुरुषोत्तम कहा जाता है. उनके गुणों और महिमा का गान रामायण में वर्णित है. गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब श्रीरामचरितमानस की रचना की तो उसके अंत में आरती श्री रामायण जी की लिखी. हिंदू घरों में श्रीरामचरितमानस का पाठ किया जाता है और उसका समापन श्री रामायण जी की आरती से करते हैं. श्रीरामचरितमानस पाठ और आरती करने से पाप मिटते हैं और नकारात्मकता का नाश होता है.

आरती श्री रामायण जी की (Aarti Shri Ramayan Ji Ki)

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिय पी की॥

गावत ब्रहमादिक मुनि नारद।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद॥

शुक सनकादिक शेष अरु शारद।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ आरती श्री रामायण जी की…

गावत बेद पुरान अष्टदस।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस॥

मुनि जन धन संतान को सरबस।
सार अंश सम्मत सब ही की॥ आरती श्री रामायण जी की…

गावत संतत शंभु भवानी।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी॥

ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की॥ आरती श्री रामायण जी की…

कलिमल हरनि बिषय रस फीकी।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की॥

दलनि रोग भव मूरि अमी की।
तात मातु सब बिधि तुलसी की॥ आरती श्री रामायण जी की…

आरती श्री रामायण जी की।
कीरति कलित ललित सिय पी की॥

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आरती श्री रामायण जी की अर्थ और महत्व

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥ इसका अर्थ यह है कि हम रामायण जी की आरती करते हैं, जिसमें माता सीता और उनके प्रियतम प्रभु राम की कीर्ति, पवित्रता कलंक रहित और सुशोभित है.

गावत ब्रहमादिक मुनि नारद। बाल्मीकि बिग्यान बिसारद॥ शुक सनकादिक शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ इसका अर्थ है ब्रह्मा जी, नारद मुनि, अन्य देवता, वाल्मीकि जी भगवान राम और सीता की कीर्ति गाते हैं. शुकदेव, सनकादिक मुनि, शेषनाग और माता सरस्वती भी भगवान राम की उस कीर्ति का वर्णन करते हैं, जिसे हनुमानजी ने स्वयं रचा है.

गावत बेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस॥ मुनि जन धन संतान को सरबस। सार अंश सम्मत सब ही की॥ इसका अर्थ है कि चारों वेद और 18 पुराण इनकी महिमा का गान करते हैं, वहीं इस रामायण में छः शास्त्रों समेत दुनियाभर के ग्रंथों का रस है. यह सभी मुनियों, संतों के लिए धन, संतान और सर्वस्व के समान है.

गावत संतत शंभु भवानी। अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी॥ ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी। कागभुशुंडि गरुड़ के ही की॥ इसका अर्थ है कि राम जी के गुणों और नाम का गान तो निरंतर भगवान शिव और माता पार्वती करते हैं. परम ज्ञानी अगस्त्य मुनि भी राम के नाम की महिमा गाते हैं. भगवन राम की जिस कथा का बखान व्यास आदि श्रेष्ठ कवियों ने किया है, जिसको कागभुशुंडि ने गरुड़ को सुनाया था, हम उस रामायण जी की आरती करते हैं.

कलिमल हरनि बिषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की॥ दलनि रोग भव मूरि अमी की। तात मातु सब बिधि तुलसी की॥ इसका अर्थ है कि यह रामकथा कलियुग के पापों को मिटाने वाली है, इसकी महिमा सांसारिक वस्तुओं के रस को फीका कर देने वाली है. यह मुक्ति रूपी युवती के लिए सुंदर श्रृंगार के समान है. यह राम कथा मोक्ष प्रदान करने वाली जड़ी-बूटी है. यह तो तुलसीदास के लिए माता-पिता की तरह पालन-पोषण और रक्षा करने वाली है. हम उस रामायण जी की आरती करते हैं.

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