बगलामुखी जन्मोत्सव कब है? जानें तारीख, मुहूर्त, कैसे प्रकट हुईं पर विजय दिलाने वाली देवी
Baglamukhi Janmotsav 2026 Date: देवी बगलामुखी 10 महाविद्याओं में से एक हैं. उनको आठवीं देवी कहा जाता है, जो स्तंभन और शत्रुओं के दमन की देवी कहा जाता है. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी देवी का प्रकाट्य हुआ था. इस वजह से हर साल इस तिथि को बगलामुखी जन्मोत्सव मनाते हैं. इस बार बगलामुखी जन्मोत्सव पर पुष्य नक्षत्र और रवि योग बना है. बगलामुखी जन्मोत्सव कब है, आज या कल? जानें सही तारीख, मुहूर्त और बगलामुखी देवी का प्रकाट्य कैसे हुआ?
बगलामुखी जन्मोत्सव 2026 तारीख
पंचांग के अनुसार, बगलामुखी जन्मोत्सव के लिए वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि आज 23 अप्रैल को रात 08:49 पी एम से शुरू हो रही है और यह 24 अप्रैल को शाम 07:21 पी एम तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर बगलामुखी जन्मोत्सव 24 अप्रैल शुक्रवार को है.
बगलामुखी जन्मोत्सव 2026 मुहूर्त
24 अप्रैल को बगलामुखी जन्मोत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:19 ए एम से 05:03 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:53 ए एम से 12:46 पी एम तक रहेगा. मंत्रों की सिद्धि के लिए निशिता मुहूर्त देर रात 11:57 पी एम से लेकर 25 अप्रैल को 12:41 ए एम तक है.
पुष्य नक्षत्र और रवि योग में बगलामुखी जन्मोत्सव
इस साल बगलामुखी जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र और रवि योग में है. इस दिन पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 08:14 पी एम तक है. वहीं रवि योग रात में 08:14 पी एम से लेकर अगले दिन 25 अप्रैल को सुबह 05:46 ए एम तक है.
कैसे प्रकट हुईं बगलामुखी देवी?
बगलामुखी देवी के प्रकट होने के बारे में दो कथाएं हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी के एक ग्रंथ को एक राक्षस ने चुरा लिया और पाताल लोक में जाकर छिप गया. तब ब्रह्मा जी ने देवी भगवती की साधना की तो बगलामुखी देवी प्रकट हुईं. उन्होंने बगुले का रूप धारण करके उस राक्षस का वध किया और वह ग्रंथ ब्रह्मा जी को लौटाया.
दूसरी कथा के अनुसार, सतयुग में भीषण तूफान के कारण धरती के अस्तित्व पर संकट आ गया. तब जगत के पालनहार भगवान विष्णु भगवान शिव के शरण में गए तो उन्होंने कहा कि इस संकट से आदिशक्ति बचा सकती हैं. तब भगवान विष्णु ने आदिशक्ति की तपस्या प्रारंभ की. उनके तप से प्रसन्न होकर मां आदिशक्ति गुजरात के सौराष्ट्र में हरिद्रा झील में बगलामुखी स्वरूप में प्रकट हुईं. उन्होंने पृथ्वी के संकट को दूर किया.
बगलामुखी के अन्य नाम
देवी बगलामुखी को देवी पीतांबरा के नाम से भी जानते हैं क्योंकि इनको पीला रंग प्रिय है. देवी का रंग पीला है. इनको ब्रह्मास्त्र रूपिणी भी कहा जाता है.
देवी बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिर
मध्य प्रदेश के दतिया में पीतांबरा पीठ है, जो काफी प्रसिद्ध है. वहीं मध्य प्रदेश में ही नलखेड़ा में देवी बगलामुखी का मंदिर हैं, जहां महाभारत काल से अखंड ज्योति जल रही है. तीसरा मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बनखंडी प्राचीन मंदिर है.
देवी बगलामुखी की पूजा का महत्व
जो व्यक्ति बगलामुखी देवी की पूजा करता है, उसे युद्ध और शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है. वे अपने भक्तों को वशीकरण और कीलन यानि बंधन की शक्ति प्रदान करती हैं. कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता प्रदान करती हैं.


