Akshaya Tritiya पर मां अन्नपूर्णा को खीर का भोग लगाकर करें यह छोटा सा उपाय, कभी नहीं होगी

Akshaya Tritiya पर मां अन्नपूर्णा को खीर का भोग लगाकर करें यह छोटा सा उपाय, कभी नहीं होगी

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Akshaya Tritiya पर मां अन्नपूर्णा को खीर का भोग लगाकर करें यह छोटा सा उपाय

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Akshaya Tritiya 2026: आज देशभर के मंदिरों में अक्षय तृतीया के मौके पर कई धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं. अक्षय तृतीया हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है और इसे वर्ष के सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है. अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, यानी इस दिन किए गए पुण्य कर्म, दान और जप-तप का फल अक्षय रहता है.

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का पावन पर्व आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है, यह पर्व हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया हर शुभ कार्य अक्षय फल देता है, यानी जिसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता. विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने और सोना खरीदने के लिए यह तिथि विशेष रूप से शुभ मानी जाती है. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. अक्षय तृतीया के दिन खीर का भोग लगाने का विशेष महत्व है.

अक्षय तृतीया पर शुभ योग का संयोग – ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय के अनुसार, इस वर्ष वैशाख शुक्ल तृतीया रविवार को सुबह 10 बजकर 47 से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगी. इस दिन कृतिका नक्षत्र प्रातः 07:36 बजे तक रहेगा, इसके बाद रोहिणी नक्षत्र और सौभाग्य योग का विशेष संयोग बन रहा है. मध्याह्न काल में चंद्रमा वृष राशि में रहेंगे, जिससे शुभता और अधिक बढ़ जाती है.

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य और स्नान का महत्व – धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन समुद्र स्नान और मध्याह्न काल में सत्तू, शर्करा, जल, फल, मिष्ठान एवं पंखा आदि का दान अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन किए गए दान से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है.

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अक्षय तृतीया पर खीर का महत्व – ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि अक्षय तृतीया के आदि शक्ति जगदंबा को बाल्यावस्था में ऋषियों द्वारा अक्षय पात्र प्रदान किया गया था, जिसमें रखा अन्न कभी समाप्त नहीं होता. इसी मान्यता के आधार पर लोगों को इस दिन पीतल के पात्र में गोदुग्ध से खीर बनाकर मां अन्नपूर्णा को भोग लगाना चाहिए और परिवार में प्रसाद वितरित करना चाहिए. इसके बाद उसी पात्र में चावल या गेहूं भरकर रखने से घर में वर्षभर अन्न और धन की कमी नहीं रहती और पारिवारिक सामंजस्य बना रहता है.

शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ दिन – अक्षय तृतीया को बिना मुहूर्त के भी अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार या कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी दिन भगवान भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

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राशियों पर प्रभाव – इस वर्ष अक्षय तृतीया मिथुन लग्न में प्रारंभ हो रही है, जिसके अनुसार विभिन्न राशियों पर इसका प्रभाव भी अलग-अलग रहेगा. मेष राशि के लिए स्थान परिवर्तन और धन लाभ के योग हैं, जबकि वृष राशि को मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है. मिथुन के लिए कार्यों में वृद्धि, कर्क के लिए यश और धन लाभ, सिंह के लिए मानसिक तनाव और कन्या के लिए शारीरिक कष्ट के संकेत हैं. वहीं तुला राशि को आकस्मिक धन लाभ, वृश्चिक को व्यापार में वृद्धि, धनु और मीन को आर्थिक नुकसान, मकर को रोग वृद्धि और कुंभ राशि को धन लाभ के योग बन रहे हैं.

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