Hanuman Ji Ki Sawari के बारे में जानते हैं आप, किसके सिर पर रखकर भरते थे उड़ान?

Hanuman Ji Ki Sawari के बारे में जानते हैं आप, किसके सिर पर रखकर भरते थे उड़ान?

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Hanuman Ji Ki Sawari के बारे में जानते हैं आप, किसके सिर पर रखकर भरते थे उड़ान

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Hanuman Ji Ki Sawari: आपने ज्यादातर देवी-देवताओं को किसी ना किसी वाहन पर देखा होगा लेकिन क्या आपको पता है वीर बजरंगबली की सवारी क्या है. बहुत से लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है. हनुमानजी को वायु पुत्र माना गया है और एक बार सूर्य को फल समझकर खाने गए थे. आइए जानते हैं हनुमानजी की सवारी क्या है…

Hanuman Ji Ki Sawari: भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में देवी-देवताओं की सवारी (वाहन) का विशेष महत्व माना जाता है. जैसे भगवान शिव की सवारी नंदी बैल, माता दुर्गा की सवारी सिंह, गणेशजी की सवारी मूषक, कार्तिकेय मयुर पर, विष्णुजी गरुढ़ तो लक्ष्मीजी की सवारी उल्लू माना जाता है. इसी क्रम में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है, जब ज्यादातर देवी-देवताओं की अपनी सवारी है तो आखिर हनुमानजी की सवारी क्या है? क्योंकि ऐसी बहुत कम फोटो और वीडियोज देखने को मिलते हैं, जिसमें हनुमानजी किसी सवारी पर हों. आइए जानते हैं हनुमानजी की सवारी क्या है…

हनुमत्सहस्त्रनामस्तोत्र के 72वें श्‍लोक में बताया गया है कि हनुमानजी को वायुवाहन: कहा गया है. अर्थात हनुमानजी का वाहन वायु है. वे वायु के प्रबल वेग की वजह से एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाते हैं. इसका उदाहरण रामायण में कई बार देखने को मिलता है. जैसे लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत (जिसे संजीवनी पर्वत भी कहा जाता है) उठाया था और उसी रात यथास्थान रख आए थे. हनुमानजी ने उड़कर समुद्र पार करके सीता माता की खोज की थी. वहीं एक बार हनुमानजी ने श्रीराम और भाई लक्ष्मण को कंधों पर बैठकर उड़ान भरी थी.

धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, हनुमानजी को पवन पुत्र कहा जाता है, इसका अर्थ है कि वे वायु देव के पुत्र हैं. यही कारण है कि उनका संबंध वायु तत्व से अत्यंत गहरा माना जाता है. हनुमानजी की शक्ति, गति और सर्वव्यापकता का मुख्य स्रोत वायु ही मानी जाती है. वे जिस प्रकार आकाश में तीव्र गति से उड़ सकते हैं, वह उनकी इसी दिव्य शक्ति का प्रतीक है.

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कुछ प्रचलित जनश्रुति के अनुसार, यह भी कहा जाता है कि हनुमानजी की सवारी भूत-प्रेत हैं. जी हां, हनुमानजी भूत-प्रेत व ब्रह्म राक्षस के सिर पर पैर रखकर सवारी करते थे और इधर-उधर जाते हैं. लेकिन यह केवल एक मान्यता भर है, ऐसा कहीं लिखा देखा नहीं गया है. वहीं कुछ स्थानीय कथाओं में मान्यता है कि ऊंट हनुमानजी की सवारी है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी की नियमित पूजा से शनि की साढ़ेसाती और ढ़ैय्या के कष्टों में कमी मानी जाती है. ज्योतिषीय परंपराओं में यह विश्वास है कि हनुमानजी की कृपा से ग्रहों के दोषों का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है. धर्माचार्यों का कहना है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई हनुमान भक्ति से व्यक्ति को आध्यात्मिक बल के साथ-साथ जीवन की कई बाधाओं से मुक्ति का अनुभव हो सकता है.

मान्यता है कि हनुमानजी की उपासना से भूत-प्रेत, बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा मिलती है. भक्तों का विश्वास है कि इससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है और परिवारिक कलह, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी कमी आती है. साथ ही ज्योतिषीय दृष्टि से यह भी माना जाता है कि हनुमानजी की आराधना से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है.

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