Sheetala Saptami 2026: रवि योग में बसौड़ा या शीतला सप्तमी आज, जानें महत्व, पूजा मुहूर्त
Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है, हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को यह त्योहार मनाते हैं. हालांकि कुछ जगहों पर अष्टमी तिथि को भी शीतला माता की पूजा की जाती है. शीतला सप्तमी या अष्टमी को कई जगहों पर बसौड़ा या बासोड़ा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और पूरा परिवार भी बासी भोजन करता है, जिसको एक दिन पहले ही बनाकर रख लिया जाता है. यह पर्व मुख्यत: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजारत आदि उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की पूजा करने से घर-परिवार को रोगों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं शीतला माता की पूजा का महत्व, पूजन विधि, पूजा मुहूर्त और क्यों खाते हैं इस दिन बासी भोजन…
शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला सप्तमी के दिन मां शीतला की पूजा करने से परिवार में स्वास्थ्य और शांति बनी रहती है. पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि मां शीतला अपने भक्तों को रोगों और महामारी से बचाती हैं. मां शीतला को अक्सर गधे पर सवार और हाथों में झाड़ू, सूप और जल से भरा कलश धारण किए हुए दर्शाया जाता है. झाड़ू को साफ-सफाई का प्रतीक माना जाता है, जबकि जल का कलश रोगों को शांत करने का संकेत देता है. इसलिए इस पर्व को स्वच्छता और स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है.
शीतला सप्तमी 2026 आज
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 9 मार्च दिन सोमवार की मध्य रात्रि को में 11 बजकर 27 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 11 मार्च दिन बुधवार की मध्य रात्रि को 1 बजकर 54 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को मानते हुए शीतला सप्तमी की पूजा-अर्चना 10 मार्च दिन मंगलवार को किया जाएगा.
स्वास्थ्य से जुड़ा है माता शीतला का पर्व
मां शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. खासकर चेचक, फुंसी-दाने और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए प्राचीन समय से उनकी पूजा की परंपरा चली आ रही है. इसी आस्था के चलते देश के कई राज्यों में यह पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. बसौड़ा के प्रसाद में आमतौर पर पूड़ी, मीठे चावल, कढ़ी, सब्जी, दही, गुड़ और अन्य व्यंजन शामिल होते हैं. माना जाता है कि मां शीतला को ठंडा भोजन प्रिय है, इसलिए उन्हें बासी या ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है.
शीतला सप्तमी 2026 शुभ योग
शीतला सप्तमी पर रवि नामक शुभ योग बन रहा है, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. रवि योग आज सुबह 6 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहने वाला है. इस योग में की गई पूजा और दान को विशेष फलदायी माना जाता है. इसलिए श्रद्धालु इस दिन मां शीतला की पूजा कर परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं. रवि योग के साथ आज कुंभ राशि में राहु, मंगल, सूर्य और बुध ग्रह के होने से आदित्य मंगल योग, बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग, चतुर्ग्रही योग समेत कई योग बन रहे हैं.
शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त 2026
- सुबह 5 बजकर 37 मिनट से 6 बजकर 37 मिनट तक
- सुबह 6 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक
- दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक
शीतला सप्तमी 2026 पूजन विधि
आज श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से पहले ही उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनते हैं. इसके बाद पास के शीतला माता के मंदिर जाकर माता को प्रणाम करते हैं और गंगाजल, दूध, शहद, पानी आदि से अभिषेक कराएं.. इसके बाद पूजा की थाली में रखी रोली, चावल, फूल, धूप-दीप, गुड़, दही आदि चीजों को एक एक करके अर्पित करें. साथ ही होली के दिन की बची हुई 5 गूलरी भी माता को अर्पित करें. इसके बाद माता के भोग के लिए पूड़ी, मीठा चावल, बासी रोटी, बताशे आदि सभी सामग्रियों को अर्पित कर दें. अब आटे के दीपक से माता रानी की पूजा अर्चना करें और कथा का पाठ करें. फिर माता रानी से परिवार की सुख-समृद्धि व अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है.
बासी भोजन का लगता है माता रानी को भोग
शीतला सप्तमी को कई जगहों पर बसोड़ा या बसौड़ा कहा जाता है और इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं पकाया जाता. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला के भोग और घरवालों के लिए एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है क्योंकि शीतला सप्तमी के दिन घर का चूल्हा ना जलने की परंपरा है. फिर दूसरे दिन सूर्य निकलने से पहले शीतला माता का पूजन किया जाता है और घर के सभी सदस्य बासी भोजन करते हैं. घर के सदस्यों को ताजी भोजन बसौड़ा के अगले दिन ही मिलता है. हालांकि जिस घर में चेचक से कोई बीमार सदस्य है, उस घर में यह व्रत नहीं करना चाहिए. शीतला सप्तमी का पर्व शीत ऋतु के अंत और ग्रीष्मकाल के प्रारंभ होने का भी प्रतीक है.


