शुभ योग में आज रंग पंचमी, देवी-देवता भक्तों के साथ खेलेंगे होली, जानें महत्व, मंत्र, आरती

शुभ योग में आज रंग पंचमी, देवी-देवता भक्तों के साथ खेलेंगे होली, जानें महत्व, मंत्र, आरती

Rang Panchami 2026: देशभर में आज श्रद्धा और उत्साह के साथ रंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है. यह त्योहार होली के पांच दिन बाद यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों के साथ होली खेलते हैं इसलिए इस पर्व को देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन रंगों से खेलना नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाता है. इस बार रंग पंचमी पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आइए जानते हैं रंग पंचमी का महत्व, आरती, पूजा विधि और मंत्र…

रंग पंचमी 2026 आज
पंचमी तिथि की शुरुआत – 7 मार्च, शाम 7 बजकर 20 मिनट से
पंचमी तिथि का समपान – 8 मार्च, रात 9 बजकर 14 मिनट तक
उदिया तिथि को मानते हुए रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च यानी आज मनाया जाएगा.

रंग पंचमी का महत्व
रंग पंचमी का पर्व ब्रज में 40 दिन तक लगातार चलने वाली होली के समापन के तौर पर भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंग पंचमी का संबंध देवी-देवताओं से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि इस दिन देवता भी धरती पर आकर रंगों के उत्सव में शामिल होते हैं. इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है. इस दिन गुलाल और रंगों से खेलना केवल उत्सव नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक रंग पंचमी का दिन वातावरण को शुद्ध करने और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है. होलिका दहन के बाद से शुरू हुआ उत्सव रंग पंचमी के साथ पूर्ण माना जाता है. कई स्थानों पर लोग मंदिरों में जाकर भगवान को गुलाल अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

रंग पंचमी पर शुभ योग
आज रंग पंचमी पर कई शुभ योग बन रहे हैं. दरअसल कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और मंगल की युति बन रही है, जिससे चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग समेत आदित्य मंगल योग भी बन रहा है. इन शुभ योग में भगवान कृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना करने का विशेष फल मिलता है.

कैसे मनाई जाती है रंग पंचमी?
रंग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है और घर के मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है. कई लोग इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष पूजा भी करते हैं. पूजा के बाद भगवान को गुलाल, फूल और मिठाई अर्पित की जाती है. इसके बाद लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां साझा करते हैं. कई शहरों में रंग पंचमी पर विशेष जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जहां लोग ढोल-नगाड़ों और संगीत के साथ रंगों का उत्सव मनाते हैं.

रंग पंचमी पूजा के मंत्र
ॐ श्री कृष्णाय नम:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
ॐ ह्रीं श्रीं राधिकायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय नमः
ॐ वृषभानुजायै विद्महे, कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात्
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

रंग पंचमी की पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंग पंचमी के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और घर के मंदिर में दीपक जलाएं. इसके बाद भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या अपने इष्ट देव की पूजा करें. पूजा के दौरान भगवान को गुलाल, अबीर, फूल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर भगवान से सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करें. साथ ही इस दिन तुलसी पूजन और हवन करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. कई लोग इस दिन गरीबों को भोजन, वस्त्र या मिठाई दान भी करते हैं, जिसे बेहद पुण्यदायी माना जाता है. शाम के समय पूजा पाठ करने के बाद माता लक्ष्मी की भी पूजा करें और घी का दीपक जलाएं.

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥ ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम रक्षक मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वमी कष्ट हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
ॐ जय जगदीश हरे

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