Holashtak 2026 Start Date: होलाष्टक कब से लगेगा? इसमें क्यों नहीं होते हैं कोई शुभ कार्य, नोट कर लें शुरू और समापन की तारीख

Holashtak 2026 Start Date: होलाष्टक कब से लगेगा? इसमें क्यों नहीं होते हैं कोई शुभ कार्य, नोट कर लें शुरू और समापन की तारीख

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Holashtak 2026 Start Date: होलाष्टक होली से पहले के 8 दिनों को कहा जाता है. पंचांग के अनुसार होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी ति​थि से शुरू होकर फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है. इसमें कोई शुभ काम नहीं करते हैं. इस साल होलाष्टक कब से लगेगा और कब खत्म होगा? आइए जानते हैं होलाष्टक शुरू और खत्म होने की तारीख.

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2026 में होलाष्टक के प्रारंभ और समापन की तारीख क्या है?

Holashtak 2026 Start Date: होलाष्टक का प्रारंभ फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी ति​थि से होता है. होलाष्टक अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है. होलाष्टक की इन 8 तिथियों में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं. अगर कोई गलती से भी होलाष्टक में शुभ कार्य करता है तो उसमें विघ्न और बाधाएं आती हैं. उसके परिणाम अशुभ फलदायी होते हैं. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं कि होलाष्टक के प्रारंभ और समापन की तारीख क्या है? होलाष्टक में शुभ कार्य क्यों नहीं करते हैं?

2026 में होलाष्टक कब से लगेगा?

पंचांग के अनुसार, होलाष्टक प्रारंभ की तिथि यानि फाल्गुन शुक्ल अष्टमी ति​थि 24 फरवरी दिन मंगलवार को प्रात:काल 7 बजकर 01 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 25 फरवरी दिन बुधवार को प्रात:काल में 4 बजकर 51 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर होलाष्टक 24 फरवरी मंगलवार से शुरू है.

होलाष्टक का समापन कब होगा?

इस साल होलाष्टक का समापन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा ति​थि को होगा. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च दिन सोमवार को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि 3 मार्च मंगलवार को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर खत्म होगी. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर होलाष्टक का समापन 3 मार्च मंगलवार को होगा.

होलाष्टक में उग्र हो जाते हैं ग्रह, नहीं होते शुभ कार्य

ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी का कहना है कि होलाष्टक के समय में ग्रह उग्र हो जाते हैं, ऐसी स्थिति में कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है. ग्रह जब उग्रावस्था में रहेंगे तो उनसे शुभ परिणाम की अपेक्षा नहीं कर सकते हैं. इस वजह से होलाष्टक में कोई बड़े फैसले या बड़े काम करने से बचना चाहिए.

होलाष्टक में भक्त प्र​ह्लाद को दी गई यातनाएं

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान कहता था और अपने पुत्र प्रह्लाद पर विष्णु भक्ति की वजह से क्रोधित रहता था. ऐसे में उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को कई प्रकार से यातनाएं दी, ताकि वो भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ दे. प्रह्लाद को हाथी के पैरों के तले कुचलने, पहाड़ से फेंकने जैसी कई याताएं दी गई, लेकिन वे हर बार बच गए. उनकी बुआ होलिका ने प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने का प्रयास किया. प्रह्लाद को ये यातनाएं होलाष्टक की आठ तिथियों में दी गईं. इस वजह से भी होलाष्टक को अशुभ माना जाता है.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 12 वर्षों का अनुभव है. डिजिटल पत्रक…और पढ़ें

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होलाष्टक कब लगेगा? इसमें क्यों नहीं होते शुभ कार्य,नोट कर लें शुरू-समापन तारीख

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