भगवान शिव के इस मंदिर में है पृथ्वी के 'आरंभ और अंत' का रहस्य! जानें यहां मौजूद चार स्तंभों का रहस्य

भगवान शिव के इस मंदिर में है पृथ्वी के 'आरंभ और अंत' का रहस्य! जानें यहां मौजूद चार स्तंभों का रहस्य

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Kedareshwar Cave Shiv Temple: वैसे तो आपने कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे, जो चमत्कार या ऐतिहासिक होंगे लेकिन भारत के महाराष्ट्र में एक ऐसा मंदिर है, जहां संपूर्ण सृष्टि का रहस्य छिपा हुआ है. जी हां, यह मंदिर कलियुग के अंत की सूचना देता है और हर मौसम में यहां का तापमान भी बदलता रहता है. आइए जानते हैं महाराष्ट्र के इस प्रसिद्ध मंदिर के बारे में…

Kedareshwar Cave Shiv Temple: कुछ मंदिर दिखने में जितने साधारण होते हैं, उससे कहीं ज्यादा उनकी मान्यताएं होती हैं. भारत के कुछ मंदिर अपने अंदर इतिहास और आने वाले भविष्य को संजोए बैठे हैं. महाराष्ट्र के हरिश्चंद्रगढ़ किले में स्थित केदारेश्वर उन्हीं चमत्कारी मंदिरों में से एक है. माना जाता है कि पृथ्वी की शुरुआत इसी मंदिर से हुई थी और अंत भी इसी मंदिर में होगा. इस मंदिर में बने स्तंभ कलयुग के अंत का संकेत देते हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी भक्तों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मन की हर इच्छा पूरी हो जाती है. यह मंदिर ना केवल इतिहास की वजह से प्रसिद्ध था बल्कि इस मंदिर में सृष्टि का रहस्य छिपा हुआ है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में…

मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित
मंदिर की कोई वास्तुकला नहीं है और ना ही मंदिर को भव्य बनाने में किसी तरह खर्च किया गया है, लेकिन फिर भी भक्त दूर-दूर से भगवान शिव के केदारेश्वर रूप के दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जहां सालोंभर पानी भरा रहता है. मंदिर के चारों ओर भरा पानी भी मौसम के अनुसार अपना तापमान बदलता रहता है. सर्दियों में पानी गुनगुना और गर्मियों में बर्फ जितना ठंडा हो जाता है.

मंदिर के चार स्तंभ चार युग के प्रतीक
मान्यता है कि मंदिर के चार स्तंभ सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग के प्रतीक हैं. मंदिर के तीन स्तंभ टूट चुके हैं और एक ही बाकी है. कहा जाता है कि बचा हुआ स्तंभ कलयुग का प्रतीक है, जब कलयुग खत्म होगा, तब यह स्तंभ भी टूटकर गिर जाएगा और पृथ्वी का विनाश हो जाएगा. मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत दुर्गम है, जो पहाड़ियों से होकर गुजरता है. मंदिर तक पहुंचने का कोई पक्का रास्ता भी नहीं बना है. पहाड़ी पर ट्रेकिंग के जरिए ही मंदिर तक पहुंचा जाता है.

5 फीट का शिवलिंग विराजमान
मंदिर की गुफा के बीच में 5 फीट का शिवलिंग विराजमान है. माना जाता है कि शिवलिंग स्वयंभू है. भगवान शिव स्वयं तपस्या के बाद यहां प्रकट हुए थे. गुफा के ऊपर मंदिर का गोपुरम बना है, जिसका निर्माण पत्थर की सहायता से किया गया. इसका निर्माण छठी शताब्दी में कलचुरी राजवंश ने किया था. 11वीं सदी में गुफाओं की खोज हुई. मंदिर के आसपास प्रकृति का अनोखा नजारा देखने को मिलता है, जो भक्तों को अपनी तरफ आकर्षित करता है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

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इस मंदिर में है पृथ्वी के ‘आरंभ और अंत’ का रहस्य! जानें चार स्तंभों का रहस्य

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