हर पूजा-पाठ के बाद क्षमायाचना करना क्यों है जरूरी? ऐसा नहीं किया तो क्या पूजा होगी असफल, जानें मंत्र और महत्व

हर पूजा-पाठ के बाद क्षमायाचना करना क्यों है जरूरी? ऐसा नहीं किया तो क्या पूजा होगी असफल, जानें मंत्र और महत्व

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हिंदू धर्म में पूजा पाठ के कई नियम बताए गए हैं, इन्हीं नियमों के आधार पर हमारी पूजा पूरी होती है. जिस तरह शास्त्रों में भोग, स्नान, प्रार्थना, ध्यान तक के मंत्र बताए गए हैं, उसी तरह पूजा-पाठ के बाद क्षमायाचना भी इन्हीं नियमों से एक है और तभी पूजा पाठ पूरी मानी जाती है. आइए जानते हैं क्षमयाचाना मंत्र…

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Shama Yachna Mantra in Hindi: सनातन धर्म में किसी भी देवी-देवता की पूजा में मंत्रों का बहुत महत्व दिया गया है. पूजा की हर क्रिया जैसे प्रार्थना, स्नान, ध्यान, भोग आदि के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं. इन्हीं में से एक है क्षमायाचना मंत्र. कहा जाता है कि पूजा के अंत में जब हम भगवान से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हैं, तभी वह पूजा पूरी मानी जाती है. पूजा में अगर जाने-अनजाने कोई गलती हो जाती है तो एक बार अंत में क्षमा अवश्य मांग लें और इसको लेकर एक मंत्र भी है. इस मंत्र के माध्यम से आप अपने भावनाओं को ईश्वर के समक्ष रखते हैं, तभी पूजा-अर्चना पूरी भी मानी जाती है. आइए जानते हैं पूजा पाठ के बाद किस तरह क्षमा मांगे और क्या मंत्र है…

क्यों जरूरी है क्षमायाचना मंत्र?
पूजा-पाठ हो या दैनिक जीवन में होने वाली चीजें, क्षमा सबसे बड़ा भाव होता है. सभी देवी देवताओं की पूजा में मंत्र समेत कई क्रियाएं की जाती हैं और फिर आरती कर पूजा संपन्न मानी जाती है. अक्सर पूजा करते समय जाने-अनजाने हमसे कई गलतियां हो जाती हैं, जैसे कभी उच्चारण में गलती, कभी विधि में कोई कमी या कभी ध्यान कहीं और चला जाता है. अपनी गलतियों पर क्षमा मांगने के बाद ही पूजा-पाठ संपन्न माना जाता है इसलिए पूरी पूजा हो जाने के बाद हम भगवान से क्षमायाचना करते हैं. इसके लिए एक खास मंत्र भी है.

क्षमायाचना मंत्र (Shama Yachna Mantra)
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे॥

इस मंत्र का अर्थ है कि हे प्रभु, मुझे न तो आपको बुलाना आता है, न ही सही तरह से पूजा करना. मैं आपकी आराधना की विधि नहीं जानता. मैं मंत्रहीन, क्रियाहीन और भक्तिहीन इंसान हूं. मेरे द्वारा की गई पूजा को स्वीकार करें. अगर इस दौरान मुझसे कोई गलती हुई हो तो मुझे क्षमा करें.

यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं
ऐसा करने के पीछे का उद्देश्य साफ है कि जब भी हम भगवान की पूजा करते हैं तो हमसे जाने-अनजाने में कोई न कोई कमी या भूल चूक हो जाती है. इसलिए हमें पूजा के बाद भगवान से क्षमायाचना जरूर करनी चाहिए. जीवन में जब भी हमसे कोई गलती हो, तो हमें तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए, चाहे वह भगवान से हो या किसी इंसान से. क्षमा मांगने से अहंकार खत्म होता है और रिश्तों में प्रेम व अपनापन बना रहता है. यही सच्ची भक्ति और मानवता का मूल है. इसलिए पूजा के अंत में जब हम भगवान से क्षमा याचना करते हैं. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि विनम्रता और आत्मचिंतन का प्रतीक भी है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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