इन 5 मंदिरों का प्रसाद घर ले जाना माना जाता है अपशकुन, जानें रहस्यमयी वजह

इन 5 मंदिरों का प्रसाद घर ले जाना माना जाता है अपशकुन, जानें रहस्यमयी वजह

भारत को देवभूमि कहा जाता है, यहां हर राज्य, हर गांव में कोई ना कोई ऐसा मंदिर है, जिसकी अपनी रहस्यमयी कथा और परंपरा जुड़ी है. शास्त्रों के अनुसार, मंदिर जाकर प्रसाद लेने और ग्रहण करने से तन और मन शुद्ध होता है और ईश्वर का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. मौटे तौर पर कहा जाए तो मंदिरों में प्रसाद लेना शुभ माना जाता है, लेकिन भारत में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां प्रसाद खाना या छूना तक अपशकुन समझा जाता है. कहा जाता है कि इन मंदिरों का प्रसाद घर ले जाने से अशुभ घटनाएं हो सकती हैं और भूत-प्रेत समेत कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं भारत के ऐसे रहस्यमयी मंदिरों के बारे में, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद लेने से मना किया जाता है…

मेहंदीपुर बालाजी, राजस्थान
हनुमानजी को समर्पित मेहंदीपुर बालाजी का नाम तो सभी ने सुना होगा. माना जाता है कि जो लोग बुरी और नकारात्मक शक्तियों से पीड़ित होते हैं, उनको इस मंदिर में दर्शन करने से राहत मिलती है. माना जाता है कि भगवान बालाजी को बूंदी के लड्डू और भैरव बाबा को उड़द दाल और चाव का भोग लगाने से बुरी आत्माओं से छुटकारा मिलता है. इस मंदिर का प्रसाद लेना और ग्रहण करना अशुभ माना जाता है.

कामख्या देवी मंदिर, असम
असम के गुवाहाटी स्थित कामख्या देवी मंदिर को शक्ति पीठों में सबसे शक्तिशाली माना गया है. यहां देवी की पूजा उनके मासिक धर्म के दौरान की जाती है. 3-दिवसीय उत्सव के दौरान मंदिर के अंदर किसी भी भक्त को प्रवेश की अनुमति नहीं होती है इसलिए इस दौरान कोई प्रसाद नहीं लिया जा सकता. मान्यता है कि इन दिनों में देवी को विश्राम दिया जाता है, इसलिए भक्तों को प्रसाद केवल पूजा के बाद ही ग्रहण करना चाहिए.

काल भैरव मंदिर, उज्जैन
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित काल भैरव मंदिर में भक्त प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाते हैं. यह भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां यह परंपरा प्रचलित है. हालांकि, मान्यता है कि यह प्रसाद सिर्फ भगवान भैरव को अर्पित किया जाता है, गृहस्थों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. जो भी व्यक्ति इस नियम को तोड़ता है, उसके जीवन में बाधाएं आने लगती हैं. हालांकि मंदिर में भक्तों के लिए सात्विक प्रसाद जैसे जलेबी, खीर या हलवा भी उपलब्ध होते हैं.

नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल का नैना देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. यहां प्रसाद के रूप में दी जाने वाली चीजें विशेष अनुष्ठान के बाद केवल देवी को अर्पित की जाती हैं, ना कि भक्तों को. नैना देवी के प्रसाद के बारे में कहा जाता है कि मंदिर का प्रसाद आप केवल मंदिर में ही खा सकते हैं. नैना देवी का प्रसाद घर पर ले जाना अशुभ माना जाता है. अगर आप मंदिर में ही प्रसाद खा लेते हैं तब तो कोई समस्या नहीं लेकिन आप मंदिर से बाहर माता का प्रसाद लेकर ना जाएं.

कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित इस मंदिर में एक करोड़ शिवलिंगों की स्थापना है. यहां पूजा के बाद दिया गया प्रसाद केवल प्रतीकात्मक रूप से स्वीकार किया जाता है, यानी आप उसे हाथ जोड़कर ग्रहण कर सकते हैं, लेकिन खाना अशुभ माना जाता है. शिवलिंग के ऊपर से आया प्रसाद भूलकर भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह चंडेश्वर को समर्पित माना जाता है. अगर यह प्रसाद शिवलिंग के पास रखा है तो उस प्रसाद को ग्रहण किया जा सकता है.

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