Shaktipeeth Tripura Sundari Mandir: Navratri के पहले दिन 524 साल पुराने शक्तिपीठ के आगे शीश झुकाएंगे PM मोदी, बेहद रहस्यमयी हैं यहां की कहानियां

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त्रिपुरा में 524 साल पुराने शक्तिपीठ माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर का पुनर्विकास हो गया है. शारदीय नवरात्रि के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माताबाड़ी में माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर परिसर के विकास कार्य का उद्घाटन करने वाले हैं. यह मंदिर हिंदुओं द्वारा पूजे जाने वाले 51 शक्तिपीठों में से एक है. त्रिपुर सुंदरी देवी को ललिता त्रिपुर सुंदरी भी कहा जाता है, जो आदिशक्ति महाशक्ति का ही रूप हैं. त्रिपुर सुंदरी मंदिर के नाम पर ही राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा है.

यहां गिरा था माता का दायां पैर
पुराणों के अनुसार, जब सती के शरीर के खंड पृथ्वी पर गिरे, तो त्रिपुरा (वर्तमान त्रिपुरा राज्य) में माता का दायां पैर गिरा था, जिससे यह स्थान शक्ति पीठ बना. देवी यहां बालिका रूप (बालाभैरवी) और राजराजेश्वरी के रूप में पूजित हैं. त्रिपुर सुंदरी को शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री शक्ति माना गया है. ललिता सहस्रनाम, श्रीविद्या मंत्र और त्रिपुर सुंदरी यंत्र की पूजा से विवाह में विलंब, वैवाहिक कलह और आर्थिक संकट दूर होते हैं. मान्यता है कि नवरात्रि और खासकर अष्टमी व नवमी को त्रिपुरा सुंदरी माता के दर्शन व पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है. यह मंदिर साधना, श्रीविद्या उपासना और तंत्र-मार्ग के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है.

कुर्भपीठ नाम से भी है प्रसिद्ध
त्रिपुर सुंदरी मंदिर को कुर्भपीठ भी कहा जाता है. माता का यह मंदिर एक ऊंचे टीलें पर स्थित है, जो करमा (कछुए की उभरी हुई पीठ) की तरह दिखता है. माता का यह स्थान विशेष तंत्र साधना के लिए आदर्श जगह मानी जाती है. मंदिर में माता की दो मूर्ति हैं, एक मां त्रिपुर सुंदरी की एक बड़ी मूर्ति है और छोटो-मा नामक छोटी मूर्ति स्थित है. छोटे देवी मूर्ति को छोटे-छोटे अवसरों पर साथ ले जाया जाता है, जैसे राजाओं द्वारा युद्ध या शिकार के समय. नवरात्रि, दिवाली आदि त्योहारों के समय विशाल मेले और उत्सव होते हैं.

1501 में मंदिर का कराया था निर्माण
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर गोमती जिले के मुख्यालय उदयपुर में स्थित है. यह मंदिर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है. महाराजा धन्य माणिक्य ने 1501 में इस मंदिर का निर्माण कराया था. त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, कोलकाता के कालीघाट स्थित काली मंदिर और गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर के बाद पूर्वी भारत में तीसरा ऐसा मंदिर है. हर साल दीपावली का पर्व मनाने के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं. 15 अक्टूबर, 1949 को महारानी कंचन प्रभा देवी और भारतीय गवर्नर जनरल के बीच एक विलय समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद त्रिपुरा की पूर्ववर्ती रियासत भारत सरकार के नियंत्रण में आ गई.

चौकोर आकार का है मंदिर का गर्भगृह
यह मंदिर भगवान शिव की अर्द्धांगिनी देवी पार्वती के अवतार देवी त्रिपुर सुंदरी को समर्पित है. मंदिर में चौकोर आकार का गर्भगृह है, जिसे ठेठ ग्रामीण बंगाल झोपड़ी के मॉडल में डिजाइन किया गया है. मंदिर के पीछे स्थित कल्याणसागर झील परिसर के पूरे वातावरण को शानदार बनाती है, जिसमें कछुए विचरण करते दिखते हैं.

51 शक्तिपीठ पार्क का निर्माण
गोमती जिले के बंदुआर में 97.70 करोड़ रुपए की लागत से 51 शक्तिपीठ पार्क का निर्माण किया जा रहा है. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने 13 जुलाई को पार्क की आधारशिला रखी थी. यह निर्माणाधीन पार्क त्रिपुरा सुंदरी मंदिर से चार किलोमीटर दूर स्थित है. पार्क में आगंतुकों के लिए फूड कोर्ट, दुकान, पेयजल सुविधा, पार्किंग और सार्वजनिक सुविधा, अतिथि आवास, पौराणिक कथाओं को समर्पित संग्रहालय होगा.

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