Durga Puja 2025 Date: दुर्गा पूजा कब है? 5 दिनों तक चलेगा उत्सव, जानें तारीख, मूर्ति विसर्जन का दिन

Durga Puja 2025 Date: दुर्गा पूजा कब है? 5 दिनों तक चलेगा उत्सव, जानें तारीख, मूर्ति विसर्जन का दिन

दुर्गा पूजा मुख्यत: शारदीय नवरात्रि के समय अक्टूबर में मनाते हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पितृ पक्ष के समापन के ठीक बाद नवरात्रि शुरू होती है. दुर्गा पूजा अश्विन शुक्ल षष्ठी ति​थि से प्रारंभ होकर दशमी तक होती है. दिनों के आधार पर दुर्गा पूजा का उत्सव 4 या 5 दिनों का होता है. महा षष्ठी में लोग बिल्व निमंत्रण के साथ इसका शुभारंभ करते हैं. उसके बाद महा सप्तमी पर कोलाबोऊ पूजा, महाअष्टमी, महा नवमी पर आरती और महा दशमी को दुर्गा विसर्जन करते हैं. उससे पहले सुहागन महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं. आइए जानते हैं कि इस साल दुर्गा पूजा कब है? दुर्गा पूजा का मूर्ति विसर्जन कब होगा?

दुर्गा पूजा का शुभारंभ

दृक पंचांग के अनुसार, अश्विन शुक्ल षष्ठी ति​थि का प्रारंभ 27 सितंबर को दोपहर 12:03 पी एम से होगा और यह 28 सितंबर को 02:27 पी एम तक मान्य है. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर 28 सितंबर को महाषष्ठी ​से दुर्गा पूजा का शुभारंभ होगा.

दुर्गा पूजा का समापन

इस साल दुर्गा पूजा का समापन 2 अक्टूबर दिन गुरुवार को दुर्गा विसर्जन के साथ होगा. पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल दशमी तिथि 1 अक्टूबर को शाम 7:01 बजे से लेकर 2 अक्टूबर को शाम 7:10 बजे तक है. 2 अक्टूबर को दशहरा और विजयादशमी का उत्सव मनाया जाएगा.

दुर्गा पूजा का कैलेंडर

दुर्गा पूजा का पहला दिन: महा षष्ठी, 28 सितंबर, दिन रविवार

दुर्गा पूजा का दूसरा दिन: महा सप्तमी, 29 सितंबर, दिन सोमवार, नवपत्रिका पूजा और कोलाबोऊ पूजा

दुर्गा पूजा का तीसरा दिन: 30 सितंबर, दिन मंगलवार, महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी

दुर्गा पूजा का चौथा दिन: 1 अक्टूबर, दिन बुधवार, महा नवमी, नवमी हवन

दुर्गा पूजा का पांचवा दिन: 2 अक्टूबर, दिन गुरुवार, दुर्गा विसर्जन, सिंदूर खेला, विजयादशमी

दुर्गा पूजा कैसे मनाते हैं?

महालया के दिन आदिशक्ति मां दुर्गा का आगमन धरती पर होता है. वे कैलाश पर्वत से अपने वाहन पर सवार होकर अपने पुत्रों का​र्तिकेय और गणेश के साथ अपने मायके आती हैं. महाषष्ठी के दिन मां दुर्गा की मूर्तियों का अनावरण करते हैं.

महा सप्तमी के दिन केले के पौधे की पूजा करते हैं. इसे कोलाबोऊ पूजा कहते हैं. इस दिन पानी में केले के पौधे को डाला जाता है. लाल बॉर्डर वाली साड़ी केले के पौधे को पहनाया जाता है और उसे गणेश जी के पास स्थापित करते हैं.

महा अष्टमी का दिन महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा का है, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था. इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा होती है. महा नवमी का प्रारंभ संधि पूजा से होता है. नवमी का समापन महाआरती से होता है.

महा दशमी या विजयदशमी के दिन मां दुर्गा के साथ अन्य देवी और देवताओं के मूर्तियों का विसर्जन होता है. ​मां दुर्गा को विदा करते समय सुहागन महिलाएं सिंदूर उत्सव मनाती हैं, जिसे सिंदूर खेला भी कहते हैं. इसमें वे एक दूसरे को लाल रंग का सिंदूर लगाती हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Source link

Previous post

Ganesha Mantra: गणेश उत्सव के दौरान गणपति के इन 8 पावरफुल मंत्रों का करें जप, प्रसन्न हो जाएंगे बप्पा

Next post

Lolark chhath 2025: काशी के इस कुंड में डुबकी लगाने से भर जाती है सूनी गोद! जानिए किस देव की होती पूजा और महत्व

You May Have Missed