Shukra Pradosh Vrat 2025 Date: सितंबर का पहला प्रदोष व्रत कब है? 3 शुभ योग में व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व

Shukra Pradosh Vrat 2025 Date: सितंबर का पहला प्रदोष व्रत कब है? 3 शुभ योग में व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व

सितंबर का पहला प्रदोष व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह भाद्रपद का अंतिम प्रदोष व्रत है. शुक्रवार दिन को होने की वजह से यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाता है. शुक्र प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं, जो काफी शुभ फलदायी हैं. शुक्र प्रदोष पर व्रत रखकर ​भगवान शिव की पूजा शाम के समय में करते हैं. भगवान महादेव की कृपा से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, धन, संपत्ति, वैभव आदि की प्राप्ति होती है. कष्ट मिटते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि शुक्र प्रदोष व्रत यानि सितंबर का पहला प्रदोष व्रत कब है? प्रदोश पूजा का मुहूर्त क्या है?

सितंबर का पहला प्रदोष व्रत

दृक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 5 सितंबर को तड़के 4 बजकर 8 मिनट पर होगी. यह तिथि 6 सितंबर को तड़के 3 बजकर 12 मिनट तक मान्य है. ऐसे में सितंबर का पहला प्रदोष व्रत 5 सितंबर शुक्रवार को है.

शुक्र प्रदोष मुहूर्त

5 सितंबर को शुक्र प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सवा 2 घंटे से अधिक का है. उस दिन शिव जी की पूजा आप शाम को 6 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 55 मिनट के बीच कर सकते हैं. प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय में ही करते हैं, तो वह ज्यादा शुभ फलदायी होती है.

शुक्र प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:16 ए एम तक है. उस दिन अभिजीत मुहूर्त 11:54 ए एम से दोपहर 12:45 पी एम तक है. वहीं उस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 11:57 पी एम से मध्य रात्रि 12:43 ए एम तक है.

प्रदोष पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 06:01 ए एम से बन रहा है, जो देर रात 11:38 पी एम तक रहेगा. वहीं रवि योग देर रात 11:38 पी एम से अगले दिन 6 सितम्बर को 06:02 ए एम तक है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं. प्रदोष व्रत श्रवण नक्षत्र प्रात:काल से लेकर देर रात 11:38 पी एम तक है, उसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र है.

शुक्र प्रदोष पर रुद्राभिषेक का समय

शुक्र प्रदोष के दिन जिन लोगों को रुद्राभिषेक कराना है, वे लोग सूर्योदय के बाद से रुद्राभिषेक करा सकते हैं. रुद्राभिषेक के लिए जरूरी शिव वास नन्दी पर प्रात:काल से लेकर 6 सितंबर को तड़के 03:12 ए एम तक रहेगा.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

यदि आपको अपने शत्रुओं पर जीत चाहिए तो आपको शुक्र प्रदोष व्रत करना चाहिए. सुखी दांपत्य जीवन के लिए भी शुक्र प्रदोष व्रत रखते हैं. भौतिक सुख, सुविधाओं की प्राप्ति भी शुक्र प्रदोष व्रत कराता है. संकट, रोग, दोष से मुक्ति के लिए शुक्र प्रदोष व्रत करते हैं.

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