Bhishma Pitamah ke pita ka naam​: भीष्म पितामह के पिता का नाम क्या था? जानिए किन महान गुणों की हासिल थी महारथ

Bhishma Pitamah ke pita ka naam​: भीष्म पितामह के पिता का नाम क्या था? जानिए किन महान गुणों की हासिल थी महारथ

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Bhishma Pitamah ke pita ka naam​: भीष्म पितामह के पिता का नाम महाराजा शान्तनु और माता का नाम गंगा था. भीष्म का असली नाम देवव्रत था और वे हस्तिनापुर के राजा शान्तनु के पुत्र थे.

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भीष्म पितामह के पिता का नाम क्या था? जानिए किन महान गुणों की हासिल थी महारथजानिए, महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह के पिता का नाम. (AI)
Bhishma Pitamah ke pita ka naam​: महाभारत का चिर परिचित चेहरा भीष्म पितामह आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. वे महाभारत के महान योद्धाओं में एक थे. बचपन में भीष्म पितामह का नाम देवव्रत था. उनमें पिता की तरह न केवल अतुल बल था, बल्कि पुरषार्थ भी थी. इसके चलते बाद में उन्हें पितामह भी कहा जाने लगा. धर्म शास्त्रों की मानें तो भीष्म पितामह का जीवन त्याग, धर्म और प्रतिज्ञा का अद्भुत उदाहरण है. इसलिए आज भी जब महाभारत की चर्चा होती है तो भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा, त्याग और उनका ज्ञान जरूर याद किया जाता है. अब सवाल है कि आखिर महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह के पिता का नाम क्या था? कौन थीं उनको जन्म देने वाली मां? उनके पिता को किन महान गुणों का महारथी माना जाता है? आइए जानते हैं महाभारत के कुछ रोचक तथ्य-

भीष्म पितामह के पिता इन गुणों के महारथी?

महान योद्धा भीष्म पितामह के पिता का नाम महाराजा शान्तनु था. उनको जन्म देने वाली मां का नाम गंगा था. कहा जाता है कि महाराजा शान्तनु में अतुल बल और पुरषार्थ की कोई कमी नहीं थी. गंगा के आठवें पुत्र होने के नाते उनका जन्म ही रहस्यमय और विशेष था. बचपन में भीष्म पितामह का नाम देवव्रत था. देवव्रत बाल्यावस्था से महान योद्धा थे. उनमें पिता की तरह न केवल अतुल बल था, बल्कि पुरषार्थ भी था. इस वजह से उन्हें पितामह भी कहा जाता है.

भीष्म पितामह पिता कहां के राजा थे?

महायोद्धा, धर्मनिष्ठ और अटूट प्रतिज्ञा के प्रतीक भीष्म पितामह के पिता शान्तनु हस्तिनापुर के राजा थे. उनकी जीवन यात्रा त्याग, कर्तव्य और तपस्या का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है. भीष्म पितामह का असली नाम देवव्रत था और वे गंगा के आठवें पुत्र थे. जन्म से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक घटनाओं की शृंखला ऐसी है जो प्रेरणा भी देती है और भावुक भी करती है.

गंगा और शांतनु का विवाह और वचन

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हस्तिनापुर के राजा शांतनु गंगा से विवाह करना चाहते थे. गंगा ने उनकी इच्छा स्वीकार तो की लेकिन एक शर्त रखी कि राजा उनके किसी भी कार्य पर सवाल नहीं करेंगे. राजा शांतनु ने यह शर्त मान ली और दोनों का विवाह हुआ. विवाह के बाद जब गंगा ने पहला पुत्र जन्मा तो उसे नदी में प्रवाहित कर दिया. राजा शांतनु यह देखकर दुखी हुए, लेकिन उन्होंने वचन निभाया और कुछ नहीं बोले. इसी तरह गंगा ने अपने सात पुत्रों को नदी में बहा दिया.

जब गंगा ने आठवें पुत्र को जन्म दिया और उसे भी नदी में प्रवाहित करने लगीं तो इस बार राजा शांतनु खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने गंगा को रोक दिया. गंगा इस पर नाराज होकर राजा को छोड़ अपने आठवें पुत्र को लेकर स्वर्ग लोक चली गईं. वहीं, आठवां पुत्र आगे चलकर देवव्रत के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इतिहास में भीष्म पितामह के रूप में जाना गया.

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