Hartalika Teej 2025 Chalisa: हरतालिका तीज पर पढ़ें तीज चालीसा, मिलेगा अखंड सौभाग्य, दांपत्य जीवन होगा खुशहाल
पार्वती चालीसा
दोहा
जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि।
गणपति जननी पार्वती अम्बे! शक्ति! भवानि।
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे,
पंच बदन नित तुमको ध्यावे।
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो,
सहसबदन श्रम करत घनेरो।।
स्थित रक्षा लय हिय सजाता।
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे,
अति कमनीय नयन कजरारे।।
कुंकुंम अक्षत् शोभा मनहर।
कनक बसन कंचुकि सजाए,
कटी मेखला दिव्य लहराए।।
जाहि देखि सहजहि मन लोभा।
बालारुण अनंत छबि धारी,
आभूषण की शोभा प्यारी।।
तापर राजति हरि चतुरानन।
इन्द्रादिक परिवार पूजित,
जग मृग नाग यक्ष रव कूजित।।
कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय।
त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी,
अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी।।
त्रिभुवन के जो नित रखवारे।
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब,
सुकृत पुरातन उदित भए तब।।
महिमा का गावे कोउ तिनकी।
सदा श्मशान बिहारी शंकर,
आभूषण हैं भुजंग भयंकर।।
नीलकण्ठ की पदवी पायी।
देव मगन के हित अस किन्हो,
विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो।।
दुरित विदारिणी मंगल कारिणी।
देखि परम सौंदर्य तिहारो,
त्रिभुवन चकित बनावन हारो।।
लज्जा मय है सलिल तरंगा।
सौत समान शम्भू पहआयी,
विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी।।
लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो।
नित्यानंद करी बरदायिनी,
अभय भक्त कर नित अनपायिनी।।
माहेश्वरी, हिमालय नन्दिनी।
काशी पुरी सदा मन भायी,
सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी।।
कृपा प्रमोद सनेह विधात्री।
रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे,
वाचा सिद्ध करि अवलम्बे।।
अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली।
सब जन की ईश्वरी भगवती,
पतिप्राणा परमेश्वरी सती।।
नारद सों जब शिक्षा लीनी।
अन्न न नीर न वायु अहारा,
अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा।।
उमा नाम तब तुमने पायउ।
तप बिलोकी ऋषि सात पधारे,
लगे डिगावन डिगी न हारे।।
सप्तऋषि, निज गेह सिद्धारेउ।
सुर विधि विष्णु पास तब आए,
वर देने के वचन सुनाए।।
चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों।
एवमस्तु कही ते दोऊ गए,
सुफल मनोरथ तुमने लए।।
पुनः कहाई हर की बामा।
जो पढ़िहै जन यह चालीसा,
धन जन सुख देइहै तेहि ईसा।।
कूटि चंद्रिका सुभग शिर,
जयति जयति सुख खानि,
पार्वती निज भक्त हित,
रहहु सदा वरदानि।
माता पार्वती की जय…तीज माता की जय!


