तुलसी माता की पूजा में की ये गलती तो हो सकता है अनिष्ट, जानें सही विधि और नियम, क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज
तुलसी माता को सनातन धर्म में लक्ष्मी जी का स्वरूप माना गया है. यही कारण है कि इसे घर की समृद्धि, खुशहाली और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन प्रेमानंद महाराज जी ने एक ऐसा रहस्य बताया है जो हर महिला और परिवार के लिए जानना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर पूजा में छोटी-सी भी गलती हो जाए तो देवी-देवता रूठ जाते हैं और घर की बरकत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.
महाराज जी ने बताया कि हर महिला को जैसे ही नींद से आंख खुले तो सबसे पहले अपने पति का चेहरा देखना चाहिए. यह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि धर्म का नियम है. धर्म ग्रंथों के अनुसार पति को पत्नी का सबसे बड़ा देवता माना गया है. चाहे वह सफल हो या असफल, अच्छा हो या साधारण, लेकिन धर्म की दृष्टि से वह पत्नी के लिए भगवान के समान है, अगर पति पास में न हो या महिला अविवाहित हो तो उसे भगवान श्रीकृष्ण या लड्डू गोपाल के दर्शन करने चाहिए. इस नियम को अपनाने से पूरा दिन मंगलमय होता है और घर में बरकत बढ़ती है.
स्नान का खास तरीका
स्नान तो हर कोई करता है, लेकिन महाराज जी ने कहा है कि अगर पानी में हल्दी की एक चुटकी डाल दी जाए तो यह साधारण स्नान नहीं रह जाता. यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और चंद्रमा को बलवान बनाता है. इसके परिणामस्वरूप घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. हल्दी स्नान को शास्त्रों में शुद्धता और सौभाग्य से जोड़ा गया है.
तुलसी माता की पूजा में सबसे बड़ी गलती
बहुत सी महिलाएं बिना सोचे-समझे सुबह या शाम किसी भी समय तुलसी माता को जल चढ़ा देती हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है. तुलसी माता को जल केवल सुबह ही अर्पित करना चाहिए. दोपहर या शाम को जल चढ़ाना अशुभ माना गया है. इसके अलावा बिना स्नान किए अगर जल चढ़ाया जाए तो यह गंभीर अपराध होता है. इससे घर में दरिद्रता और परेशानियां बढ़ने लगती हैं.
तुलसी माता को जल चढ़ाते समय एक और खास नियम का ध्यान रखना जरूरी है. जल हमेशा दक्षिण दिशा यानी सूर्य की ओर मुख करके अर्पित करना चाहिए. उत्तर दिशा से जल अर्पण करना अशुभ माना जाता है. यह छोटी-सी बात है लेकिन इसका असर बहुत गहरा होता है और सीधे घर की खुशहाली को प्रभावित करती है.
पूजा का असर
महाराज जी ने कहा है कि जो महिला इन नियमों का पालन करती है और नियमित रूप से तुलसी माता की पूजा करती है, उसके पति की तरक्की होती है, संतान प्रगति की ऊंचाइयों तक पहुंचती है और घर का वातावरण हमेशा सुख-शांति से भरा रहता है. यहां तक कि ऐसी महिला के परिवार को करोड़ों की संपत्ति और अपार सफलता मिल सकती है.
लेकिन अगर इन नियमों को नजरअंदाज किया जाए तो सुख-संपत्ति हाथ से निकल जाती है और जीवन दुखों से भर जाता है. इसीलिए तुलसी माता की पूजा को केवल कर्मकांड न मानकर जीवन सुधारने का उपाय समझना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


