भारत नहीं, इस देश में है दुनिया की सबसे ऊंची खड़ी गणेश प्रतिमा, जानिए इसका इतिहास और महत्व

भारत नहीं, इस देश में है दुनिया की सबसे ऊंची खड़ी गणेश प्रतिमा, जानिए इसका इतिहास और महत्व

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Worlds Tallest Standing Lord Ganesha Statue : जब भी भगवान गणेश की बात होती है, मन में सबसे पहले भारत की छवि उभरती है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में गणेश का धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व बहुत गहरा है. चाहे किसी नए कार्य की शुरुआत हो या फिर किसी परीक्षा की तैयारी, लोग सबसे पहले गणेश का स्मरण करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया की सबसे ऊंची खड़ी गणेश प्रतिमा भारत में नहीं, बल्कि थाईलैंड में है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

Ganesha Statue

इस भव्य कांस्य प्रतिमा को देखकर एक बात तो साफ होती है-धार्मिक आस्था सीमाओं से परे होती है. गणेश, जो भारत के कोने-कोने में पूजे जाते हैं, अब एशिया के अन्य हिस्सों में भी उतनी ही श्रद्धा से पूजे जा रहे हैं, और उनका प्रभाव हर दिन बढ़ता ही जा रहा है.

Ganesha Statue

कहां है ये प्रतीमा
थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में स्थित यह भव्य प्रतिमा ख्लोंग खुआन गणेश अंतर्राष्ट्रीय पार्क में बनाई गई है. इसकी ऊंचाई 39 मीटर है और यह प्रतिमा पूरे 854 कांसे के टुकड़ों से तैयार की गई है. यह मूर्ति 40,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई है और इसका निर्माण कार्य करीब चार वर्षों तक चला, जिसे वर्ष 2012 में पूरा किया गया. यह प्रतिमा केवल एक स्थापत्य चमत्कार नहीं है, बल्कि थाईलैंड की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था का प्रतीक भी है.

Ganesha Statue

बड़ी संख्या में आते भक्त
भगवान गणेश की यह विशाल प्रतिमा बंग पकोंग नदी के किनारे बनी है और सड़क तथा जलमार्ग से आने वाले लोग इसे दूर से ही देख सकते हैं. इसका आकार इतना विशाल है कि यह दूर-दूर से दिखाई देती है और यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. चाचोएंगसाओ क्षेत्र में यह स्थान आज एक प्रमुख दर्शनीय स्थल बन चुका है.

Ganesha Statue

4 हाथों में खास प्रतीक शामिल
इस प्रतिमा को थाईलैंड के प्रसिद्ध कलाकार पिटक चालेमलाओ ने डिज़ाइन किया था. उन्होंने भगवान गणेश के चार हाथों में खास प्रतीक शामिल किए हैं-गन्ना, कटहल, केला और आम. ये फल समृद्धि, प्रगति और आशीर्वाद के प्रतीक माने जाते हैं. गणेश का एक कदम आगे बढ़ता हुआ दिखाया गया है, जो थाई राष्ट्र के विकास और सकारात्मक सोच का संकेत देता है. प्रतिमा के सिर पर बना कमल का मुकुट ज्ञान का चिन्ह है, और सबसे ऊपर बना “ॐ” का चिन्ह उनकी दिव्यता को दर्शाता है.

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गणेश के भक्त हैं थाईलैंड वासी
थाईलैंड में गणेश की पूजा की जड़ें बहुत पुरानी हैं. यहां ब्राह्मण संस्कृति का प्रभाव करीब एक हज़ार साल पहले फैला था, और उसी समय से गणेश भी थाई समाज का हिस्सा बन गए. समय के साथ उनकी छवि ने थाईलैंड के हर क्षेत्र में अपनी जगह बना ली-चाहे वह शिक्षा हो, व्यापार, कला या जीवन की किसी और दिशा. यहां लोग मानते हैं कि गणेश के आशीर्वाद से सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है.

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मंदिरों से लेकर घरों तक पूजे जाते हैं बप्पा
गणेश की पूजा सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है. थाईलैंड के कई घरों, विश्वविद्यालयों और दुकानों में भी उनकी प्रतिमाएं या चित्र लगे हुए हैं. हर साल विशेष त्योहारों और कार्यक्रमों के माध्यम से गणेश को सम्मान दिया जाता है. इस तरह भगवान गणेश, जिनका मूल भारत में है, आज थाईलैंड की संस्कृति में भी पूरी तरह से रच-बस चुके हैं.

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