जन्माष्टमी के बाद जरूर करें ब्रज की इस जगह की परिक्रमा, माना गया है बेहद शुभ, जानें वजह

जन्माष्टमी के बाद जरूर करें ब्रज की इस जगह की परिक्रमा, माना गया है बेहद शुभ, जानें वजह

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Govardhan Parikrama After Janmashtami: जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन की परिक्रमा करने का महत्व शास्त्रों और लोकमान्यताओं में विशेष रूप से बताया गया है. मान्यता है कि जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन परिक्रमा करने से भगवान…और पढ़ें

जन्माष्टमी के बाद जरूर करें ब्रज की इस जगह की परिक्रमा, माना गया है बेहद शुभ
Govardhan Parikrama After Janmashtami: देशभर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया और हर तरफ नंद के आनंद भये जय कन्हैया लाल की के जयकारे सुनाई दिए. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ देशभर में मंदिरों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला. मथुरा, वृंदावन समेत प्रमुख तीर्थस्थलों से लेकर छोटे-छोटे गांवों तक, भक्त श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे नजर आए. अगर आप जन्माष्टमी के पर्व के लिए ब्रज मे आए हुए हैं तो गोवधर्न की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए. जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन की परिक्रमा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है. मान्यता है कि जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन की परिक्रमा लगाने से सभी तरह के दोष दूर हो जाते हैं और कष्टों में कमी आती है.

पूरे ब्रज में धूमधाम से मनाया गया जन्माष्टमी
मथुरा, वृंदावन समेत पूरे ब्रज में जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म और बाल्यकाल बीता, वहां का नजारा विशेष रूप से मनमोहक नजर आया. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हमें भक्ति, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से हमें कर्तव्य और नैतिकता का पाठ सीखने को मिलता है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को फूलों, रोशनी और रंगोली से सजाया गया. मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय मंदिरों में घंटियों की गूंज और भक्ति भजनों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया.

जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन की परिक्रमा
जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन की परिक्रमा का हमारे शास्त्रों और लोक परंपराओं में कई गूढ़ लाभ बताए गए हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण करके इन्द्र के अहंकार का नाश किया था. इसलिए इसे गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण का प्रतीक माना जाता है. जन्माष्टमी पर कृष्ण जन्मोत्सव मनाने के बाद अगर भक्त गोवर्धन की परिक्रमा करता है तो यह भगवान की विशेष कृपा दिलाता है. गोवर्धन की परिक्रमा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता आती है और भगवान कृष्ण की कृपा भी बनी रहती है.

परिक्रमा से सभी दोष होते हैं दूर
जन्माष्टमी का पर्व कृष्ण-शक्ति का आवाहन है और उसके बाद गोवर्धन परिक्रमा करने से शक्ति स्थायी और फलदायी होती है. शास्त्रों में इसे आध्यात्मिक उन्नति और सांसारिक उन्नति का संगम बताया गया है. गोवर्धन की परिक्रमा लंबी दूरी की होती है (लगभग 21 किलोमीटर), इसे करते समय भक्त भजन-कीर्तन और ध्यान में रहते हैं. इससे शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आत्मशुद्धि प्राप्त होती है. गोवर्धन की परिक्रमा को पापों का क्षय करने वाली मानी गई है और इसे करने से ग्रहदोष और पितृदोष शांत होते हैं. साथ ही शनि, राहु और केतु से पीड़ित व्यक्ति को परिक्रमा करने से कष्टों में कमी आती है.

जन्माष्टमी के बाद गोवर्धन परिक्रमा क्यों?
जब देवराज इंद्र ने मूसलधार वर्षा कर ब्रजवासियों को संकट में डाल दिया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की. इस घटना के बाद गोवर्धन पर्वत को स्वयं भगवान का रूप मानकर उसकी पूजा व परिक्रमा की परंपरा चली. जन्माष्टमी पर हम भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाते हैं. जन्म के उत्सव के बाद गोवर्धन परिक्रमा करना ऐसा माना जाता है जैसे कृष्ण के बाल्यकाल और लीलाओं का स्मरण करते हुए उनकी कृपा प्राप्त करना. इस समय की गई परिक्रमा से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि कृष्ण जन्म की दिव्य ऊर्जा उस समय वातावरण में विशेष रूप से सक्रिय रहती है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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