यमुना, भद्रा, शनि समेत 11 बच्चों के पिता हैं सूर्यदेव, जानें किस पत्नी से कितनी संतान हुईं
सूर्य पूजा का लाभ
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सुबह की पहली किरण के साथ किया गया सूर्य मंत्र—ॐ घृणि: सूर्याय नम:, बीमारियों को दूर करता है और सकारात्मकता से जीवन को भर देता है.सूर्य ग्रहों के राजा हैं और अगर कुंडली में सूर्य शुभ हो तो जातक को राज्य सम्मान, उच्च पद, नाम व यश प्राप्त होता है. हर रोज सूर्य को जल देना, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना और रविवार को व्रत रखना मानसिक शक्ति, स्वास्थ्य और आत्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना गया है.
पुराणों के अनुसार सूर्य देव की दो प्रमुख पत्नियां हैं, पहली हैं संज्ञा और दूसरी छाया.
संज्ञा– ब्रह्माजी की संतान और भगवान सूर्य की पहली पत्नी संज्ञा. संज्ञा सूर्य की प्रचंड तेज को सहन नहीं कर पाईं और छाया को अपने स्थान पर छोड़ तपस्या करने चली गईं.
छाया – संज्ञा की छाया स्वरूपा, जिन्होंने बाद में सूर्य से विवाह किया और उनसे संतानें प्राप्त कीं.
इन दोनों पत्नियों की कथा भारतीय पुराणों में गहराई से दर्ज है और यह दर्शाती है कि कैसे भावनाएं, समर्पण और धैर्य देवताओं के बीच भी होते हैं.
संज्ञा से हुई संतान
यमराज – मृत्यु के देवता
यमुना नदी- जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध नदी है
वैवस्वत मनु – जो वर्तमान मन्वन्तर के अधिपति हैं.
अश्विनी कुमार – जिन्हें चिकित्सा के देवता के रूप में जाना जाता है.
सूर्यपुत्र रेवंत – एक अन्य पुत्र है.
शनिदेव – न्याय के देवता और कर्म के कारक ग्रह
ताप्ती – सूर्यदेव की पुत्री हैं और पृथ्वी पर नदी के रूप में रहती हैं.
विष्टि (भद्रा) – सूर्यदेव की अन्य पुत्री, जो काल में आती हैं.
सावर्णि मनु – जो एक और पुत्र हैं.
महाभारत और रामायण काल
सुग्रीव – रामायण काल में बलशाली वानर हैं, उनकी माता का नाम ऋक्षराज और पिता का नाम सूर्यदेव है.
कर्ण – महाभारत काल में एक शक्तिशाली योद्धा थे और कर्ण की माता कुंती व पिता सूर्य देव थे.


