5 शुभ योग में जन्माष्टमी आज, कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा? जानें विधि, मुहूर्त, मंत्र, भोग, आरती, महत्व
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि का शुभारंभ: 15 अगस्त, रात 11:49 बजे से
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की समाप्ति: 16 अगस्त, रात 9:34 बजे पर
जन्मोत्सव मुहूर्त देर रात 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
जन्माष्टमी व्रत पारण का समय
जन्माष्टमी श्रृंगार सामग्री
बाल गोपाल की मूर्ति, मोरपंख, मुकुट, वैजयंती माला, फूलों की माला, एक बांसुरी, चंदन, पीले, लाल या रंग-बिरंगे नए कपड़े, काजल, झूला, आसन आदि.
जन्माष्टमी का भोग
माखन, मिश्री, पंजीरी, केला, लड्डू, पेड़ा, सेब, अनार, सूखे मेवे आदि.
पंचामृतं मयाआनीतं पयोदधि घृतं मधु, शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्.
ॐ भूर्भुवः स्वः गणेशाम्बिकाभ्यां नमः, पंचामृतस्नानं समर्पयामि.
जन्माष्टमी पूजा मंत्र
1. ओम नमो भगवते वासुदेवाय.
भोग लगाने का मंत्र
1. नैवेद्यं गृह्यतां कृष्ण संसारार्णवतारक।
सर्वेन्द्रियनमस्कारं सर्वसम्पत्करं शुभम्॥
गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।।
जन्माष्टमी पूजा विधि
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि जन्माष्टमी का व्रत पूरे दिन विधि विधान से करें. ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें. आज शाम को भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजा लें. एक सुंदर से पालने में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप मूर्ति को रखें. फिर जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त से पहले गणेश जी, माता गौरी, वरुण देव की पूजा करें. मध्य रात्रि में जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं.
जन्माष्टमी की आरती\श्रीकृष्ण जी की आरती
आरती कुंजबिहारी की, श्रीगिरिधर कृष्ण मुरारी की,
आरती कुंजबिहारी की, श्रीगिरिधर कृष्ण मुरारी की।
श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली,
लटन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक।
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं,
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा,
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू,
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू।
कटत भव फंद, टेर सुन दीन दुखारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की, आरती कुंजबिहारी की।।
जन्माष्टमी का महत्व
जन्माष्टमी के दिन व्रत और पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है. नि:संतान दंपत्तियों को भगवान विष्णु के आशीर्वाद से संतान सुख मिलता है. जिनको संतान सुख प्राप्त है, उनके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति आती है. संतान प्राप्ति के लिए आप हरिवंश पुराण, संतान गोपाल मंत्र का उपयोग कर सकते हैं.


