हर रविवार को करें 8 श्लोकों का यह पाठ, नवग्रह दोष होंगे दूर, मिलेगी धन-संपत्ति और संतान!
Surya Ashtakam: रविवार का दिन सूर्य देव की पूजा का है. जो लोग रविवार व्रत रखकर सूर्य देव की पूजा करते हैं, उनकी कुंडली का सूर्य दोष मिट जाता है. लेकिन आप रविवार के दिन सूर्य देव को समर्पित सूर्याष्टकम का पाठ करते हैं, तो आपके नवग्रह दोष दूर हो जाएंगे. इसके साथ ही आपको उत्तम संतान की प्राप्ति होगी, दरिद्रता दूर होगी और धन-संपत्ति से आपका घर भर जाएगा. सूर्याष्टकम में 8 श्लोक दिए गए हैं, जिसका प्रतिदिन पाठ भी अत्यंत लाभदायक होता है. इसे रोज पढ़ने से आरोग्य, तेज, बुद्धि और ऐश्वर्य की भी प्राप्ति होती है.
कब करें सूर्याष्टकम का पाठ?
सूर्याष्टकम का पाठ प्रात:काल में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद करना चाहिए. यह सबसे अच्छा समय माना जाता है.
सूर्याष्टकम पाठ विधि
आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत हो जाएं और लाल या नरंगी रंग के वस्त्र पहनें. उसके बाद एक लोटे में जल भर लें. लाल चंदन, लाल रंग के फूल और गुड़ डालें. सूर्य मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें. फिर कुशा या कंबल के आसन पर बैठ करके सूर्याष्टकम का पाठ करें.
श्री सूर्याष्टकम
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥1॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम्।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥2॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥3॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥4॥
बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥5॥
बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम्।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥6॥
तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजःप्रदीपनम्
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥7॥
तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम्।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्॥8॥
फलश्रुति
सूर्याष्टकं पठैन्नित्यं गृहपीड़ाप्रणाशनम्।
अपुत्रो लभते पुत्रं दरिद्रो धनवान भवेत्॥
आमिषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने।
सप्तजन्मभवेद्रोगी जन्मजन्मदरिद्रता॥
इति श्री शिवप्रोक्तं सूर्याष्टकं सम्पूर्णम्॥


