स्वस्थ हुए महाप्रभु जगन्नाथ! 15 दिनों बाद आज 'नवयौवन रूप' में भक्तों को देंगे दिव्य दर्शन

स्वस्थ हुए महाप्रभु जगन्नाथ! 15 दिनों बाद आज 'नवयौवन रूप' में भक्तों को देंगे दिव्य दर्शन

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15 दिनों बाद आज नवयौवन रूप में दर्शन देंगे प्रभु जगन्नाथ, जानें यात्रा शेड्यूल

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Naba Jaubana Darshan 2026: महाप्रभु जगन्नाथ 15 दिनों के एकांतवास के बाद स्वस्थ हो गए हैं. आज वे ‘नवयौवन रूप’ में भक्तों को दिव्य दर्शन देंगे, जिससे भक्तों में उत्साह का माहौल है. यह अवसर कल से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से ठीक पहले आया है. लाखों भक्त इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जब वे अपने आराध्य के नए रूप के दर्शन कर सकेंगे और रथ यात्रा में शामिल होकर पुण्य कमाएंगे.

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Naba Jaubana Darshan 2026 Today: ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा महापर्व से पहले आज यानी 15 जुलाई को नवयौवन (नबजौबन) दर्शन का आयोजन होगा. यह वह पावन अवसर होता है जब महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा स्नान पूर्णिमा के बाद पहली बार भक्तों को अपने नवयौवन स्वरूप में दर्शन देते हैं. इस दिन लाखों श्रद्धालु भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए पुरी पहुंचते हैं. आज नवयौवन दर्शन करने के बाद कल से यानी 16 जुलाई से प्रसिद्ध रथयात्रा का प्रारंभ हो जाएगा और यात्रा का समापन 27 जुलाई दिन सोमवार को होगा. आइए जानते हैं नवयौवन दर्शन का महत्व…

क्या है नवयौवन (नबजौबन) दर्शन?
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन होने वाली स्नान पूर्णिमा पर महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 स्वर्ण कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विशेष स्नान के बाद तीनों विग्रहों को ज्वर (अनसर) हो जाता है. इसके बाद वे लगभग 15 दिनों तक मंदिर के एक विशेष कक्ष में विश्राम करते हैं, जहां उनके दर्शन आम भक्तों के लिए बंद रहते हैं. इस अवधि में दैतापति सेवक भगवान की औषधीय सेवा, विशेष भोग और उपचार करते हैं. जब भगवान पूर्णतः स्वस्थ हो जाते हैं, तब उन्हें नए वस्त्र, नए श्रृंगार और ताजगी भरे युवा स्वरूप में सजाया जाता है. इसी प्रथम दर्शन को नवयौवन या नबजौबन दर्शन कहा जाता है. इसे भगवान के पुनः स्वस्थ होकर भक्तों के बीच आने का शुभ अवसर माना जाता है.

रथ यात्रा से पहले का सबसे महत्वपूर्ण दर्शन
नवयौवन दर्शन के अगले ही दिन यानी कल 16 जुलाई को भगवान तीन भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर की यात्रा के लिए निकलते हैं. इसलिए रथ यात्रा से पहले होने वाला यह दर्शन अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से दर्शन करने पर भगवान जगन्नाथ विशेष कृपा प्रदान करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

रथ यात्रा 2026 का पूरा कार्यक्रम
15 जुलाई 2026 (बुधवार): नवयौवन (नबजौबन) दर्शन
16 जुलाई 2026 (गुरुवार): भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा प्रारंभ
20 जुलाई 2026 (सोमवार): हेरा पंचमी पर माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने जाती हैं
23 जुलाई 2026 (गुरुवार): संध्या दर्शन, गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देव सुभद्रा के संध्या दर्शन होते हैं
24 जुलाई 2026 (शुक्रवार): बहुदा यात्रा, गुंडिचा मंदिर में समय पूरा करने के बाद वापस रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर जाते हैं
27 जुलाई 2026 (सोमवार): रथ यात्रा महोत्सव का समापन और पारंपरिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति

पुरी रथ यात्रा का महत्व
पुरी की रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है. हर वर्ष भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों से लाखों श्रद्धालु इस महापर्व में शामिल होने पहुंचते हैं. विशाल लकड़ी के रथों को श्रद्धालुओं द्वारा रस्सियों से खींचने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. धार्मिक दृष्टि से नवयौवन दर्शन और रथ यात्रा दोनों ही भगवान जगन्नाथ की भक्ति, समर्पण और लोककल्याण की भावना के प्रतीक माने जाते हैं. यही कारण है कि इन दोनों आयोजनों का इंतजार श्रद्धालु पूरे वर्ष करते हैं.

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Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



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