सावन में सोलह श्रृंगार का है खास महत्व, जानिए बिंदी से लेकर बिछिया तक हर गहने का महतलब

सावन में सोलह श्रृंगार का है खास महत्व, जानिए बिंदी से लेकर बिछिया तक हर गहने का महतलब

Sawan Solah Shringar: सावन का महीना आते ही मंदिरों में घंटियों की आवाज, हरियाली की रौनक और महिलाओं के सोलह श्रृंगार की खूबसूरती चारों तरफ नजर आने लगती है. इस महीने में विवाहित महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सुहाग की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं. ऐसे में सोलह श्रृंगार केवल सजने-संवरने की परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और शुभता का प्रतीक माना जाता है. हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग सोलह श्रृंगार करते तो हैं, लेकिन उसके पीछे छिपे अर्थ और महत्व से अनजान रहते हैं.

हर आभूषण का अपना अलग संदेश है. कोई सौभाग्य का प्रतीक है तो कोई आत्मविश्वास, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है, अगर आप भी सावन के दौरान सोलह श्रृंगार करती हैं या इसकी परंपरा को समझना चाहती हैं, तो आइए जानते हैं कि आखिर हर श्रृंगार का क्या मतलब है और इसे इतना खास क्यों माना जाता है.

सोलह श्रृंगार क्यों माना जाता है खास?

भारतीय परंपरा में सोलह श्रृंगार को स्त्री के सौभाग्य, सुंदरता और सम्मान का प्रतीक माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए तप किया और विवाह के बाद सोलह श्रृंगार धारण किए. तभी से यह परंपरा विशेष रूप से सावन, तीज, हरियाली तीज, करवाचौथ और अन्य शुभ अवसरों पर निभाई जाती है.

सोलह श्रृंगार के हर आभूषण का अर्थ

1. बिंदी
बिंदी को विवाहित महिला की पहचान माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यह एकाग्रता, आत्मविश्वास और शुभता का प्रतीक होती है.

2. सिंदूर
सिंदूर सुहाग का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. इसे पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है.

3. मांग टीका
मांग टीका माथे के मध्य भाग पर पहना जाता है. इसे मानसिक संतुलन, सम्मान और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है.

4. काजल
काजल आंखों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ बुरी नजर से बचाने का प्रतीक भी माना जाता है. कई परिवारों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है.

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5. नथ
नथ केवल आभूषण नहीं बल्कि विवाहिता के सम्मान और गरिमा का प्रतीक मानी जाती है. अलग-अलग राज्यों में इसके डिजाइन भी अलग होते हैं.

6. झुमके
कानों के आभूषण स्त्री की सुंदरता को निखारते हैं. पारंपरिक मान्यताओं में इन्हें शुभ और आकर्षक व्यक्तित्व का प्रतीक माना गया है.

7. हार
गले का हार समृद्धि, सम्मान और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. विवाह और त्योहारों में इसका विशेष महत्व होता है.

8. मंगलसूत्र
मंगलसूत्र विवाहित जीवन का महत्वपूर्ण प्रतीक है. इसे पति-पत्नी के विश्वास, प्रेम और अटूट रिश्ते का संकेत माना जाता है.

9. चूड़ियां
सावन में हरी चूड़ियों का विशेष महत्व होता है. इन्हें खुशहाली, नई शुरुआत और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

10. बाजूबंद
बाजूबंद शक्ति, आत्मविश्वास और शौर्य का प्रतीक माना जाता है. पुराने समय में यह राजघरानों की महिलाओं की पहचान भी था.

11. मेहंदी
मेहंदी के बिना सावन का श्रृंगार अधूरा माना जाता है. इसकी गहरी रंगत को प्रेम और शुभता से जोड़कर देखा जाता है.

12. अंगूठी
अंगूठी रिश्ते में विश्वास और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. विवाह के बाद इसे विशेष महत्व दिया जाता है.

13. कमरबंद
कमरबंद सुंदरता के साथ आत्मसंयम और गरिमा का प्रतीक माना जाता है. पारंपरिक परिधानों में इसकी अलग ही पहचान होती है.

14. पायल
पायल की मधुर आवाज घर में शुभता का संकेत मानी जाती है. इसे विनम्रता और स्त्री की कोमलता का प्रतीक भी कहा जाता है.

15. बिछिया
बिछिया केवल विवाहित महिलाएं पहनती हैं. इसे सुहाग और वैवाहिक जीवन की शुभता का प्रतीक माना जाता है.

16. इत्र या सुगंध
सोलह श्रृंगार का अंतिम भाग सुगंध है. अच्छी खुशबू को सकारात्मक वातावरण और मन की प्रसन्नता से जोड़ा जाता है.

आज के समय में भी क्यों है सोलह श्रृंगार की अहमियत?

आज भले ही फैशन बदल गया हो, लेकिन सावन और तीज जैसे अवसरों पर महिलाएं पारंपरिक सोलह श्रृंगार को अपनाना पसंद करती हैं. कई महिलाएं सभी आभूषण नहीं पहनतीं, फिर भी सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी और मंगलसूत्र जैसे श्रृंगार आज भी उनकी आस्था और परंपरा का हिस्सा बने हुए हैं. यही वजह है कि आधुनिकता के बीच भी यह परंपरा अपनी पहचान बनाए हुए है.

सोलह श्रृंगार केवल बाहरी सुंदरता का माध्यम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपरा और शुभ मान्यताओं का सुंदर संगम भी है. सावन के पावन महीने में इसका महत्व और बढ़ जाता है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसके अर्थ और परंपराएं कुछ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन इसका मूल भाव सौभाग्य, प्रेम और सकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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