शादी में आ रही है रुकावट, तो सावन सोमवार को करें ये उपाय
Last Updated:
Sawan Somwar Upay: सावन का सोमवार भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह में बार-बार रुकावट या शादी में देरी होने पर सावन सोमवार को श्रीफल, नौ हल्दी की गांठें और पीले फूल अर्पित कर पूजा करने से विवाह के योग मजबूत होने की कामना की जाती है. साथ ही माता पार्वती के सामने गौरी स्तुति का पाठ करने की भी परंपरा है.
फरीदाबाद: सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है. इस पूरे महीने में खासकर सोमवार के दिन लोग शिवजी और माता पार्वती की पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. मान्यता है कि अगर किसी लड़की या लड़के के विवाह में बार-बार रुकावट आ रही हो, अच्छा रिश्ता नहीं मिल रहा हो या शादी में लगातार देरी हो रही हो, तो सावन के सोमवार को पूरे मन से की गई पूजा शुभ फल दे सकती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ आसान उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से विवाह के योग मजबूत होने की बात कही जाती है.
हल्दी का सनातन धर्म में बहुत बड़ा महत्व
Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के पंडित उमा चन्द्र मिश्रा बताते हैं सनातन धर्म में हल्दी का बहुत बड़ा महत्व माना गया है. कोई भी शुभ या मांगलिक काम हो, हल्दी का इस्तेमाल जरूर किया जाता है.
हल्दी भगवान विष्णु का प्रतीक
पंडित उमा चन्द्र मिश्रा बताते हैं जिस कन्या के विवाह में लगातार रुकावट आ रही हो या कई साल बीत जाने के बाद भी मनचाहा रिश्ता नहीं मिल रहा हो, उसके माता-पिता सावन के किसी भी सोमवार को एक श्रीफल यानी नारियल, नौ हल्दी की गांठें और पीले कनेर का फूल लेकर भगवान शिव को अर्पित करें और बेटी के विवाह के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें.
माता पार्वती के सामने बैठकर करें यह पाठ
पंडित उमा चन्द्र मिश्रा बताते हैं जिस कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है, वह सावन के सोमवार को माता पार्वती के सामने बैठकर रामचरितमानस के बालकांड में माता सीता द्वारा की गई गौरी स्तुति का पाठ करे. इस पाठ में सिर्फ दो से तीन मिनट का समय लगता है. पूजा के बाद माता पार्वती से अपने मन की बात कहें और अच्छे जीवनसाथी की कामना करें. मान्यता है श्रद्धा और विश्वास के साथ यह उपाय करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं और अच्छे रिश्ते के योग बनने लगते हैं.
सीता माता को मिला था माता गौरी का आशीर्वाद
पंडित उमा चन्द्र मिश्रा बताते हैं रामचरितमानस में माता सीता ने विवाह से पहले माता गौरी की स्तुति की थी. इसके बाद माता गौरी ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा था…सुनु सिय सत्य असीस हमारी, पूजिहि मन कामना तुम्हारी…यानी हे सीता, मेरी सच्ची आशीष सुनो, तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी. आगे यह भी कहा गया है जिसके प्रति तुम्हारा मन अनुरक्त है…वही तुम्हें पति के रूप में मिलेगा. इसी वजह से आज भी कई लोग सावन के सोमवार को माता पार्वती की पूजा और इस चौपाई का पाठ करते हैं.
श्रद्धा और विश्वास से करें पूजा
पंडित उमा चन्द्र मिश्रा बताते हैं पूजा-पाठ का सबसे बड़ा आधार श्रद्धा और विश्वास होता है. सावन के सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने, श्रीफल, नौ हल्दी की गांठें और पीले फूल अर्पित करने के साथ गौरी स्तुति का पाठ करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उपाय विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना के लिए किया जाता है.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
और पढ़ें


