शनि साढ़ेसाती में हनुमानजी की उपासना कैसे करें? जानें किन राशियों पर है प्रभाव, मंत्र, उपा
शनि साढ़ेसाती में हनुमानजी की उपासना कैसे करें? जानें किन राशियों पर है प्रभाव
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Sade Sati Me Hanuman Ji Ki Upasana: शनि साढ़ेसाती के दौरान जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हनुमानजी की उपासना को बेहद प्रभावी माना जाता है. इस अवधि में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और सच्ची भक्ति का क्या महत्व है, यह जानना हर भक्त के लिए जरूरी है. आइए जानते हैं कि कैसे हनुमानजी की आराधना शनि के प्रकोप को शांत कर सकती है और आपको मानसिक शांति प्रदान कर सकती है.
Sade Sati Me Hanuman Ji Ki Upasana: ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती को जीवन का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान व्यक्ति को करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान की आराधना करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और साढ़ेसाती के कष्टों में राहत मिलती है. यही कारण है कि साढ़ेसाती के समय हनुमानजी की विशेष उपासना करने की सलाह दी जाती है. फिलहाल में शनि की साढ़ेसाती मेष, मीन और कुंभ राशि वालों पर चल रही है, ऐसे में इन राशियों के लोगों को बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है इसलिए हनुमानजी को संकटमोचन कहा जाता है. आइए जानते हैं शनि की साढ़ेसाती में हनुमानजी की उपासना कैसे करें…
इन राशियों पर चल रही है शनि की साढ़ेसाती
शनि की साढ़ेसाती मेष, कुंभ और मीन राशि वालों पर चल रही है. मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है, मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. वहीं कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण यानी उतरता चरण चल रहा है. शनि की साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव से बचने का केवल एक ही तरीका है और वह है हनुमानजी की उपासना. शास्त्रों में वर्णित है कि हनुमानजी की पूजा अर्चना करने वालों को शनि के अशुभ प्रभाव का सामना नहीं करना पड़ता.
इसलिए हनुमानजी की पूजा से शनि का प्रकोप होता है शांत
धार्मिक मान्यता है कि भगवान हनुमान की निष्काम भक्ति करने वाले भक्तों पर शनि देव भी अपनी कृपा बनाए रखते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमानजी ने शनिदेव को कष्टों से मुक्त कराया था, उनकी रक्षा की थी. इसलिए शनिदेव ने यह वचन दिया कि हनुमानजी की पूजा अर्चना करने वालों को वो कभी कष्ट नहीं देंगे बल्कि उनके कष्टों को दूर कर उनकी रक्षा करेंगे. इसलिए बजरंगबली की उपासना से शनि का प्रकोप शांत होता है.
साढ़ेसाती में हनुमानजी की उपासना कैसे करें?
साढ़ेसाती के दौरान हर दिन या प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को स्नान के बाद हनुमानजी की विधिवत पूजा करें. उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग अर्पित करें. पूजा के समय ॐ हनुमते नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही सच्चे मन से भगवान राम और हनुमानजी का स्मरण करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है.
साढ़ेसाती के दौरान हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हनुमान चालीसा का नियमित पाठ भय, तनाव और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है. वहीं सुंदरकांड का पाठ साहस, आत्मविश्वास और संकटों से उबरने की शक्ति प्रदान करता है. मान्यता है कि मंगलवार या शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने और हर दिन हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
हनुमान भक्ति से शनि के प्रभाव को कम करने के लिए क्या करें?
साढ़ेसाती के समय केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों का भी विशेष महत्व बताया गया है. जरूरतमंदों की सहायता करें, बुजुर्गों का सम्मान करें और किसी के साथ अन्याय ना करें. शनिवार को तिल के तेल का दीपक जलाना, काले तिल का दान करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीप प्रज्ज्वलित करना भी शुभ माना जाता है. इसके साथ ही क्रोध, अहंकार और असत्य से दूर रहकर सात्विक जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है.
हनुमानजी के प्रमुख मंत्र
मूल मंत्र – ॐ श्री हनुमते नमः
बीज मंत्र – ॐ ऐं भ्रीम हनुमते श्री राम दूताय नमः
गायत्री मंत्र – ॐ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…
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