शनि प्रदोष पर लग रहा है बड़ा दिशाशूल! जानें किस दिशा में जाने से बचें और क्या है 40 मिन
शनि प्रदोष पर 40 मिनट का उत्तम मुहूर्त! जानें किस दिशा में यात्रा करने से बचें
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Shani Pradosh Vrat Ke Shubh Ashubh Muhurat: कल शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, इस दिन भगवान शिव और शनि देव की पूजा से कष्टों में कमी और सौभाग्य की वृद्धि मानी जाती है. ज्योतिष गणना के अनुसार कल दोपहर में केवल 40 मिनट का शुभ मुहूर्त रहेगा, जिसमें ही मांगलिक और शुभ कार्य करना उत्तम होगा. साथ ही इस दिन किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए, यह जानना भी जरूरी है ताकि अशुभ फल से बचा जा सके.
Shani Pradosh Vrat Ke Shubh Ashubh Muhurat: 27 जून 2026 दिन शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और इस तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है. चूंकि यह शुभ तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है इसलिए इस तिथि को शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. भगवान शिव को समर्पित इस व्रत के करने से ना केवल शुभ कार्यों को फल मिलता है बल्कि शनिदोष से भी राहत मिलती है. जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कोई अन्य शनि दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है, इससे शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है. शनि प्रदोष व्रत का दिन कब शुभ रहेगा तो कब अशुभ, आइए जानते हैं…
कल शनि प्रदोष तिथि का व्रत
27 जून 2026 दिन शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो रात 12:43 बजे तक रहेगी. इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी. सुबह 10:29 से 12:17 बजे तक अमृत काल रहेगा और सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन शनि प्रदोष व्रत पड़ रहा है. यह दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है.
अनुराधा नक्षत्र में होंगे चंद्रदेव
इस दिन सुबह 5:47 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, शाम 5:17 बजे चन्द्रोदय और रात 3:58 बजे चन्द्रास्त होगा. पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं. चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में स्थित रहेगा और इस दिन चंद्रमा की राशि धनु होगी. वहीं, 27 जून 2026 (शनिवार) को हर्षण योग नहीं, बल्कि साध्य योग प्रभावी रहेगा. वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को कोई वज्र योग नहीं है.
यह समय शुभ कार्य के लिए उत्तम
कल यानी शनिवार के दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12:16 से 12:56 बजे तक करने से काफी शुभ रहेगा. यानी लगभग 40 मिनट का समय ही दिन के मध्य का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत फलदायी होता है.
इस दिन शुभ कार्य करने से बचें.
वहीं, राहुकाल सुबह 09:21 बजे से सुबह 11:02 बजे तक रहेगा, गुलिक काल 06:00 से 07:41 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 02:23 से 04:04 तक रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है. वहीं, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे.
इस दिशा में यात्रा करने से बचें
27 जून दिन शनिवार को पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दिशाशूल रहेगा. ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, अगर आप इस दिशा में यात्रा करते हैं तो आपको धन व शारीरिक समेत कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. अगर यात्रा करना आवश्यक भी है तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए. इसके लिए आप यात्रा करने से पहले भगवान शिव का ध्यान करें और पांच कदम उल्टे चलें, इसके बाद यात्रा पर निकलें. हालांकि शनिवार को इस दिशा में यात्रा ना करना ही सबसे उत्तम है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


