वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुले, हेलीकॉप्टर से की गई पुष्

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुले, हेलीकॉप्टर से की गई पुष्

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यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट आज खुले, चारधाम यात्रा का हुआ आगाज

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Char Dham Yatra 2026: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड के पवित्र यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. इसी के साथ देश की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई है. हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और जय मां गंगे व जय मां यमुने के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.

Yamunotri Dham and Gangotri Dham Kapat 2026: अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर रविवार को श्री यमुनोत्री धाम और श्री गंगोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं. यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलते ही वार्षिक चार धाम यात्रा का प्रारंभ भी हो चुका है. यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने से पहले वैदिक मंत्रोचार के साथ कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए. हजारों तीर्थयात्री मंदिर के प्रांगण में मौजूद रहे और चारों तरह हर हर गंगे और जय मां गंगे के जयकारे लग रहे थे. इस दौरान धाम में मौजूद भक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई. मंदिरों को फूलों से खूबसूरती से सजाया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.

गंगोत्री धाम के कपाट तय मुहूर्त पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर खोले गए. गंगोत्री धाम मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पवित्र स्थान माना जाता है. मान्यता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद मां गंगा यहां अवतरित हुई थीं. गंगोत्री में स्नान और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धि मिलती है. यहां बहने वाली भागीरथी नदी को गंगा का प्रारंभिक स्वरूप माना जाता है.

यमुनोत्री धाम का धार्मिक महत्व – अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यमुनोत्री धाम के कपाट खोले गए. यमुनोत्री धाम को मां यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमुना सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन हैं. यहां दर्शन करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. श्रद्धालु यहां गर्म जल के कुंड सूर्य कुंड में प्रसाद पकाकर देवी को अर्पित करते हैं, जो इस धाम की विशेष परंपरा है.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि आज अक्षय तृतीया के पवित्र अवसर पर श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए पूरे रीति-रिवाजों के साथ खोले जा रहे हैं. इसके साथ ही चार धाम यात्रा-2026 का भी शुभारंभ हो रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने चार धाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-हितैषी बनाने के लिए व्यापक और ठोस तैयारियां सुनिश्चित की हैं. मुख्यमंत्री धामी ने आगे कहा कि मैं माता गंगा और माता यमुना से प्रार्थना करता हूं कि वे आप सभी के जीवन को सुख, समृद्धि और प्रगति से भर दें.

इस बीच श्री केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल दिन बुधवार को खोले जाएंगे, जिसके बाद श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल दिन गुरुवार को खोले जाएंगे. शनिवार शाम तक 18.9 लाख तीर्थयात्रियों ने यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया था. केदारनाथ में सबसे अधिक 6.5 लाख पंजीकरण हुए, उसके बाद बद्रीनाथ (5.5 लाख), गंगोत्री (3.3 लाख) और यमुनात्री (3.2 लाख) का स्थान रहा.

पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड के मौसम को देखते हुए चारों तीर्थस्थलों (यमुनात्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) में अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. चार धाम यात्रा परंपरागत रूप से हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है और यमुनात्री, गंगोत्री, और केदारनाथ से होते हुए अंत में बद्रीनाथ तक जाती है, जो हर साल भारत और विदेशों से हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है.

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चारधाम यात्रा का महत्व – उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चारों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं, जो आध्यात्मिक शांति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है. यात्रा की शुरुआत परंपरागत रूप से यमुनोत्री और गंगोत्री से होती है.

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