रवि योग में विनायक चतुर्थी आज, 2 घंटे 45 मिनट है मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती
Vinayaka Chaturthi July 2026 Vrat And Puja Vidhi: आषाढ़ की विनायक चतुर्थी व्रत आज है. रवि योग में विनायक चतुर्थी का व्रत है. रवि योग सुबह से लेकर शाम तक रहेगा. आज विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा के लिए आपको 2 घंटे 45 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा. जो विनायक चतुर्थी का व्रत विधि विधान से करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. गणेश जी की कृपा से जीवन में शुभता और सफलता आती है, बिगड़े काम भी बनने लगते हैं.
जुलाई विनायक चतुर्थी का मुहूर्त और शुभ योग
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: आज, सुबह 6:27 बजे से
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि का समापन: कल, प्रात: 4:42 बजे पर
विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त: दिन में 11:05 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक
रवि योग: सुबह 5:34 बजे से लेकर शाम 06:34 बजे तक
कब से कब तक न देखें चंद्रमा
आज के दिन चंद्रोदय का समय सुबह 8:37 बजे है, वहीं चंद्रास्त रात 9:33 बजे होना है. ऐसे में आप 12 घंटे 56 मिनट तक चंद्रमा न देखें.
विनायक चतुर्थी व्रत और पूजा विधि
- सबसे पहले स्नान के बाद आप विनायक चतुर्थी व्रत और गणेश जी की पूजा का संकल्प लें. उसके बाद पूजा सामग्री की व्यवस्था कर लें.
- शुभ मुहूर्त और रवि योग में एक चौकी पर गणेश जी की स्थापना करें. उनका पंचामृत से अभिषेक करें. फिर वस्त्र, फूल, माला, अक्षत्, रोली, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य, पान, सुपारी, जनेऊ आदि अर्पित करें.
- इस दौरान आपको गणेश जी की मनोकामना पूर्ति मंत्र ॐ गं गणपतये नमो नमः मंत्र का उच्चारण करें. इस मंत्र में गणेश जी की बीज मंत्र गं भी शामिल है.
- अब आप गणपति बप्पा को मोदक, लड्डू, खीर, पूड़ी, हलवा आदि का भोग लगाएं. उनके मस्तक पर दूर्वा रखना न भूलें. हां, एक और बात कि आप तुलसी के पत्ते का उपयोग न करें क्योंकि वो गणेश पूजा के लिए श्रापित हैं.
- इसके बाद आप गणेश चालीसा पढ़ें और विनायक चतुर्थी व्रत कथा सुनें. फिर कपूर या घी वाले दीपक से गणेश जी की आरती करें. पूजा संपन्न होने के बाद क्षमा प्रार्थना करें और मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद लें.
- अब आपको दिनभर फलाहार पर रहना है. इसके साथ एक सावधानी यह रखनी है कि चंद्रमा का दर्शन गलती से भी न करें. आज चंद्रमा देखने से कलंक लगता है.
- शाम के समय में संध्या आरती करें और रात के समय में जागरण करें. फिर कल यानि 18 जुलाई को सूर्योदय के बाद स्नान आदि करके दैनिक पूजा पाठ करें.
- इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें, फिर पारण करके व्रत का पूरा करें.
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥


