मुश्किल हालात से डरना नहीं, समझना सीखें, बीके शिवानी से जानें खुद को मजबूत रखने के टिप्स
Mental Strength: जिंदगी में ऐसा कोई नहीं है जिसने मुश्किल वक्त का सामना न किया हो. कभी करियर की टेंशन, कभी रिश्तों में खटास, तो कभी अचानक आई परेशानी-हर किसी की अपनी कहानी है, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि एक ही हालात किसी के लिए बहुत बड़ा संकट बन जाता है, तो किसी के लिए बस एक छोटा सा चैलेंज. ऐसा क्यों होता है? इसका जवाब हमारे सोचने के तरीके में छिपा है. मोटिवेशनल स्पीकर बीके शिवानी अक्सर अपने सेशंस में यही समझाती हैं कि हालात नहीं, बल्कि हमारा माइंडसेट तय करता है कि हम कितने मजबूत हैं, अगर सोच सही दिशा में हो, तो मुश्किल वक्त भी हमें तोड़ने के बजाय मजबूत बना देता है. आइए जानते हैं उनके कुछ आसान और असरदार टिप्स, जो आपकी सोच को पूरी तरह बदल सकते हैं.
मुश्किल हालात में सोच क्यों बिगड़ती है?
जब जिंदगी में अचानक कोई परेशानी आती है, तो सबसे पहले हमारा मन घबरा जाता है. हम बिना सोचे-समझे उसे बहुत बड़ा बना लेते हैं. जैसे-छोटी सी गलती को हम करियर खत्म होने जैसा सोच लेते हैं या किसी की एक बात को दिल पर लेकर पूरे रिश्ते पर सवाल उठा देते हैं. असल में, समस्या उतनी बड़ी नहीं होती, जितनी हम उसे बना देते हैं. यही बात बीके शिवानी बार-बार समझाती हैं-परिस्थिति नहीं, बल्कि हमारी सोच उसका आकार तय करती है.
बीके शिवानी के टिप्स: मुश्किल वक्त में ऐसे बनें मजबूत
1. समस्या का साइज आपका मन तय करता है
किसी भी परेशानी को देखकर सबसे पहले हमारा रिएक्शन आता है-“ये बहुत बड़ा प्रॉब्लम है.” यहीं से दिक्कत शुरू होती है, अगर शुरुआत में ही हम सोच लें कि “ये भी संभल जाएगा” या “इसमें कुछ सीखने को मिलेगा,” तो आधा स्ट्रेस वहीं खत्म हो जाता है. रियल लाइफ में देखें-दो लोग एक ही नौकरी खो देते हैं. एक व्यक्ति टूट जाता है, जबकि दूसरा इसे नए मौके की तरह लेता है. फर्क सिर्फ सोच का है.
2. हर परिस्थिति में दो तरह की ऊर्जा काम करती है
बीके शिवानी के मुताबिक, हर मुश्किल समय में दो एनर्जी होती हैं:
-परिस्थिति की ऊर्जा
-मन की ऊर्जा
परिस्थिति हमारे कंट्रोल में नहीं होती, लेकिन मन जरूर होता है, अगर मन शांत और पॉजिटिव रहेगा, तो हालात अपने आप हल्के लगने लगेंगे. सोचिए, अगर आपका मन ही परेशान हो जाए, तो छोटी सी बात भी पहाड़ जैसी लगती है, लेकिन अगर मन स्थिर हो, तो बड़ी समस्या भी संभल जाती है.
3. शांत मन ही सही रास्ता दिखाता है
जब हम घबराते हैं, तो गलत फैसले लेने के चांस बढ़ जाते हैं. वहीं, शांत दिमाग से सोचा गया एक छोटा सा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है. उदाहरण के तौर पर-एग्जाम के समय अगर स्टूडेंट घबरा जाए, तो पढ़ा हुआ भी भूल जाता है, लेकिन वही स्टूडेंट अगर शांत रहे, तो बेहतर परफॉर्म करता है. इसलिए, मुश्किल वक्त में सबसे पहले खुद को शांत करना जरूरी है.
4. दूसरों के भरोसे फैसले लेना छोड़ें
अक्सर हम अपनी परेशानी में दूसरों से सलाह लेते हैं, जो ठीक है, लेकिन पूरी तरह दूसरों के फैसलों पर निर्भर हो जाना गलत है. कई बार ऐसा होता है कि हम किसी और के कहने पर फैसला ले लेते हैं, और बाद में जब चीजें गलत हो जाती हैं, तो हमें पछतावा होता है. इसलिए, सलाह लें लेकिन आखिरी फैसला खुद का होना चाहिए.
5. अपने फैसलों की जिम्मेदारी लें
बीके शिवानी कहती हैं कि हमें हर फैसले के लिए खुद जिम्मेदार बनना चाहिए.
हमेशा खुद से पूछें-
“क्या ये मेरा निर्णय है?”
“क्या मैं इसके नतीजे स्वीकार कर सकता हूं?”
जब हम जिम्मेदारी लेते हैं, तो अंदर से एक अलग तरह की ताकत महसूस होती है. इससे आत्मविश्वास भी बढ़ता है और हम मजबूत बनते हैं.
आखिर में: सोच बदलते ही जिंदगी बदलती है
मुश्किल वक्त हमेशा रहेगा, लेकिन उसे कैसे देखना है, ये पूरी तरह हमारे हाथ में है, अगर हम हर समस्या में डर देखने के बजाय सीख देखने लगें, तो वही मुश्किल वक्त हमें आगे बढ़ाने का जरिया बन सकता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


