महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र क्यों नहीं उठाया? लेकिन एक बार हो गए विवश
Mahabharat me Krishna Ji ka Hathiyar: कौरवों ने जब पांडवों का 5 गांव देने का प्रस्ताव ठुकरा दिया तो फिर कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध होना तय हो गया. इस धर्म युद्ध में एक ओर पांडव तो दूसरी ओर कौरव थे. पांडवों की ओर से भगवान श्रीकृष्ण भी थे, वे अर्जुन के रथ के सारथी थे, लेकिन इस महाभारत के युद्ध में उन्होंने शस्त्र नहीं उठाए. इसका कारण था दुर्योधन को दिया गया वचन. लेकिन एक बार भगवान श्रीकृष्ण शस्त्र उठाने पर विवश हो गए, लेकिन उसका प्रयोग नहीं किया. भीष्म पितामह ने उनको शस्त्र उठाने के लिए विवश कर दिया था.
श्रीकृष्ण जी ने महाभारत युद्ध में शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा क्यों ली थी?
जब यह तय हो गया कि युद्ध के बिना कौरव पांडवों को उनका हक नहीं देने वाले. तो अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के पास मदद मांगने के लिए द्वारका पहुंचे. लेकिन देखा कि दुर्योधन पहले से ही वहां विराजमान है.
भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन और अर्जुन की मदद करने का वादा किया ताकि किसी के साथ पक्षपता न हो. उन्होंने दोनों से कहा कि एक तरफ उनकी नारायणी सेना है और दूसरी तरफ वे खुद रहेंगे, लेकिन शर्त यह है कि वे युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे.
उनकी इस बात को सुनकर दुर्योधन ने उनकी नारायणी सेना को चुना, जबकि अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण को चुना. दुर्योधन ने सोचा था कि जब श्रीकृष्ण शस्त्र ही नहीं उठाएंगे तो फिर निहत्थे योद्धा का युद्ध में क्या काम? हालांकि दुर्योधन की इस मूर्खता पर उसके मामा शकुनि नाराज हुए थे.
महाभारत का जब युद्ध शुरू हुआ तो कौरवों को नारायणी सेना मिल गई, तो दूसरी ओर भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बन गए.
क्या श्रीकृष्ण जी ने कभी अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने की कोशिश की थी?
महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने कभी अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने की कोशिश नहीं की थी, लेकिन एक बार गंगापुत्र भीष्म ने उनको शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया था. दरअसल युद्ध में एक समय पितामह भीष्म ने अर्जुन का वध करने या फिर श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर विवश करने की प्रतिज्ञा ले ली थी.
अगले दिन भीष्म ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा कर दी. उनकी भयंकर तीरंदाजी से अर्जुन संकट में घिर गए. उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने भीष्म की प्रतिज्ञा की मान रखने और अर्जुन के प्राणों की रक्षा के लिए पहली बार शस्त्र उठाया. रथ का एक पहिया लेकर वे भीष्म की ओर बढ़े, लेकिन तब अर्जुन ने उनको अपनी प्रतिज्ञा याद दिलाई और वे वापस आ गए. शस्त्र उठाया लेकिन उसका प्रयोग नहीं किया.
महाभारत में कृष्ण जी की भूमिका क्या थी?
महाभारत युद्ध के समय में भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के शांति दूत थे. युद्ध से पूर्व वे कौरवों के समक्ष शांति का प्रस्ताव लेकर गए थे, वे केवल 5 गांव दे दें. लेकिन दुर्योधन नहीं माना और उनको ही बंदी बनाने पर आतुर था. तब उन्होंने उस सभा में अपना विकराल स्वरूप धारण किया.
इसके अलावा वे कुशल रणनीतिकार और राजनीतिज्ञ थे. धर्म रक्षक और पांडवों के संकटमोटक थे. द्रौपदी की लाज बचाने के लिए वे आगे आए तो युद्ध में भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण, दुर्योधन जैसे योद्धाओं को कैसे परास्त करना है, उसकी कुशल रणनीति बनाई.
इन सबके अलावा युद्ध से पूर्व उन्होंने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया, पांडवों का मार्गदर्शन किया, जिससे वे विजयी रहे.


