बुधवार को आखिर क्यों बेटी को नहीं भेजा जाता ससुराल, क्या इसे माना जाता है अपशकुन?

बुधवार को आखिर क्यों बेटी को नहीं भेजा जाता ससुराल, क्या इसे माना जाता है अपशकुन?

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भारतीय परंपरा में शकुन-अपशकुन का खास ख्याल रखा जाता है. कोई भी शुभ काम करते समय इन बातों का काफी ध्यान दिया जाता है. वहीं बेटी को बुधवार को ससुराल नहीं भेजा जाता है, ये भी प्रथा काफी समय से चली आ रही है. इसके प…और पढ़ें

बेटी की विदाई

हाइलाइट्स

  • बुधवार को बेटी को ससुराल भेजना अशुभ माना जाता है.
  • बुध ग्रह के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में परेशानी हो सकती है.
  • बुधवार को यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता है.

भारतीय संस्कृति में कुछ मान्यताएं और परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हैं. इनमें से कुछ परंपराएं शुभ और अशुभ समय से जुड़ी हुई हैं. ऐसा ही एक विचार बुधवार के दिन बेटियों को ससुराल भेजने से जुड़ा है. कई लोग मानते हैं कि बुधवार के दिन बेटियों को ससुराल नहीं भेजना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है. इस पर पंडित अनिल शर्मा का क्या कहना है.

इस मान्यता के पीछे कई कारण बताए जाते हैं

बुध ग्रह का प्रभाव: ज्योतिष के अनुसार बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित होता है. बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी और संचार का कारक माना जाता है. कुछ लोगों का मानना है कि बुधवार के दिन बेटी को ससुराल भेजने से उसके वैवाहिक जीवन में परेशानियां आ सकती हैं. बुध ग्रह और चंद्रमा एक दूसरे के शत्रु माने गए हैं. ऐसे में चन्द्रमा को यात्रा का कारक माना गया है, इसलिए बेटी को बुधवार के दिन ससुराल भेजने से मना किया जाता है.

यात्रा में कठिनाई: ऐसा माना जाता है कि बुधवार के दिन यात्रा करना शुभ नहीं होता है, इसलिए इस दिन बेटियों को ससुराल भेजने से रास्ते में किसी प्रकार की कठिनाई या दुर्घटना होने की आशंका रहती है.

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पारिवारिक संबंध: कुछ लोगों का मानना है कि बुधवार के दिन बेटी को ससुराल भेजने से परिवार में तनाव और मनमुटाव पैदा हो सकता है. इससे रिश्तों में खटास आ सकती है.

सामाजिक मान्यता: यह भी एक सामाजिक मान्यता है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. बहुत से लोग इसे केवल एक परंपरा मानते हैं और इसका पालन करते हैं.

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हालांकि, इन सभी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. बहुत से लोग इन बातों को नहीं मानते हैं और बुधवार के दिन अपनी बेटियों को ससुराल भेजते हैं. यह व्यक्तिगत विश्वास और परंपरा का मामला है. किसी भी दिन को शुभ या अशुभ मानना व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर निर्भर करता है.

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बुधवार को आखिर क्यों बेटी को नहीं भेजा जाता ससुराल? क्या ये है अपशकुन?

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