फिजिकल संबंध बनाने से रोजा टूट जाता है या नहीं, जानें क्या कहते हैं इस्लामिक नियम

फिजिकल संबंध बनाने से रोजा टूट जाता है या नहीं, जानें क्या कहते हैं इस्लामिक नियम

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Ramadan 2025: रमजान का पाक महीना चल रहा है और ईद की तारीख चांद के दिखने पर निर्भर करेगी. रमजान के दिनों में अल्लाह की इबादत और रोजा रखे जाते हैं. रोजा रखने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, इन नियमों के आधार पर ही र…और पढ़ें

रमजान के इस्लामिक नियम

हाइलाइट्स

  • रोजे के दौरान दिन में फिजिकल संबंध हराम है.
  • रात में फिजिकल संबंध जायज है.
  • रोजे के दौरान फिजिकल संबंध पर कफ्फारा जरूरी है.

रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है और यह इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का नौंवा महीना माना जाता है. इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग खुदा की इबादत करते हैं और रोजा रखते हैं. इस्लाम धर्म में रोजा रखने के कुछ खास नियम बताए गए हैं, इन नियमों के आधार पर ही रोजा पूरा माना जाता है. अगर इन नियमों को सही तरीके से फॉलो ना किया जाए तो रोजा टूट सकता है. अक्सर लोगों के मन में रोजा को लेकर कुछ सवाल रहते हैं कि उन्हीं में से एक फिजिकल संबंध बनाने को लेकर है. क्या फिजिकल संबंध बनाने से रोजा टूट जाता है या नहीं. आइए जानते हैं रोजा में फिजिकल संबंध बनाने को लेकर क्या हैं नियम…

संबंध बनाना जायज है या नहीं
रमजान के पाक महीने में अगर रात के समय फिजिकल संबंध बनाए जाएं तो यह जायज है. रात सूरज के डूबने से लेकर सुबह होने तक रहती है. लेकिन रमजान में दिन के समय फिजिकल संबंध बनाना हराम माना जाता है और यह उन चीजों में से एक है जो रोजे को तोड़ती है. रोजे के समय जो फिजिकल संबंध बनाते हैं, उनको कजा के साथ उसका कफ्फारा यानी की प्रायश्चित करना होगा. वहीं जो व्यक्ति रोजा के समय अपनी बीबी यानी पत्नी का बोसा करने यानी माथे पर किस करते हैं तो उनका रोजा नहीं टूटता है बल्कि इससे संबंध और भी अधिक मजबूत होते हैं.

अल्लाह ने बनाया हुक्म को आसान
अल्लाह ने जब पहली बार रोजा रखने का हुक्म दिया गया था, तो मुसलमानों के लिए रात में सोने के बाद खाने-पीने या फिजिकल संबंध करना हराम था. लेकिन इस हुक्म से उनमें से कुछ को परेशानी होती थी, इसलिए अल्लाह ने उनके लिए इसे आसान बना दिया और रोजे की रातों में किसी भी समय खाने-पीने और फिजिकल संबंध बनाने की इजाजत दी, चाहे वे सोए हों या नहीं.

गुनाह का यह है उपाय
उस पुरूष और स्त्री के लिए रमजान के दिन के दौरान फिजिकल संबंध बनाना हराम है, जिन पर रमजान में रोजा रखना अनिवार्य है. ऐसा करने में गुनाह है और इसके लिए कफ्फारा अनिवार्य है. इस नाह का कफ्फारा यह हो कि एक गुलाम आजाद करना है और जो इस पर सक्षम न हों, वह लगातार दो महीने रोजा रखें और जो इसकी ताकत न रखता हो वह 60 मिस्कीनों यानी गरीब व जरूरतमंद को खाना खिलाएं.

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