पूजा-मांगलिक कार्यों से पहले नहीं करते आचमन तो सब व्यर्थ, जानें सही विधि, मंत्र, महत्व
पूजा-मांगलिक कार्यों से पहले नहीं करते आचमन तो सब व्यर्थ,जानें सही विधि, मंत्र
Last Updated:
Aachman Vidhi And Mantra: पूजा-मांगलिक कार्यों से पहले आचमन करने का विधान है. जब आप आचमन करके पूजा पाठ करते हैं तो उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है, नहीं तो सब करना व्यर्थ होता है. आचमन के लिए 3 मंत्रों का उच्चारण करते हैं और विशेष मुद्रा बनानी होती है. आइए जानते हैं आचमन की विधि, मंत्र और महत्व.
आचमन की सही विधि और मंत्र. (Photo: AI)
How To Do Aachman: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ या कोई भी मांगलिक कार्य करने से पहले आचमन का विधान है. आपने देखा होगा कि जब पूजा-पाठ करते हैं तो पंडित जी अपने यजमान को आचमन कराते हैं. इसमें लोग हाथ में पवित्र जल लेकर अपने मुंह से लगाते हैं. आचमन क्या होता है? आचमन करने के फायदे क्या हैं? आचमन कैसे करना चाहिए या आचमन की सही विधि क्या है? इसके बारे में शास्त्रों में वर्णन मिलता है.
आचमन क्या है?
हिंदू धर्म में पूजा पाठ के प्रारंभ से पूर्व स्वयं को शुद्ध करने की प्रक्रिया को आचमन कहा जाता है. प्रत्यके कार्य में आचमन करने का विधान है. मंत्रों की मदद से आचमन किया जाता है.
आचमन करने से क्या होता है?
शास्त्रों के अनुसार, जब हम आचमन करते हैं तो इससे स्वयं की शुद्धि तो होती ही है, जगत के रचनाकार ब्रह्माजी से लेकर इस धरती के तृण यानि घास तक को तृप्त कर देते हैं. जो व्यक्ति आचमन नहीं करता है, उसके किए गए सभी मांगलिक कार्य या पूजा पाठ व्यर्थ हो जाते हैं. इस वजह से शौच के बाद भी आचमन करने का विधान बताया गया है.
आचमन की सही विधि (Right way to do Aachman)
- व्यक्ति को लांग लगाकर, अपनी शिखा बांधकर, उपवीत होकर और बैठकर तीन बार आचमन करना चाहिए.
- लांग लगाने का अर्थ है कि जब आप धोती पहनें तो उसके एक हिस्से को दोनों पैरों के बीच से ले जाकर पीछे कमर में खोंस लें. उपवीत का मतलब है कि आप अपने जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर और दाहिने हाथ के नीचे धारण करें.
- आचमन के लिए व्यक्ति को पूर्व दिशा, उत्तर या ईशान कोण की ओर मुख करके बैठना चाहिए. अपने हाथ को दोनों घुटनों के भीतर रखना चाहिए. आचमन के समय में व्यक्ति का मुख दक्षिण या पश्चिम में नहीं होना चाहिए.
- शास्त्रों के अनुसार, आचमन के लिए इतना जल लें कि वह आपके कंठ या जीभ तक पहुंच जाए.
- आचमन में अपनी हथेली को मोड़कर गाय के कान की तरह बना लें. अंगूठे और कनिष्ठा अंगुली को अलग कर लें. बाकी अंगुलियों को आपस में सटाकर ह्म तीर्थ से मंत्र बोलते हुए आचमन करें. हथेली में अंगूठे का प्रारंभ जहां से होता है, उसे ब्रह्मतीर्थ स्थान कहा जाता है.
- आचमन करते समय आवाज नहीं होनी चाहिए. आचमन के समय में आप अपने बाए हाथ की तर्जनी से दाएं हाथ के जल को छूते हैं तो सोमपान का फल मिलता है.
- आचमन के समय आपको ओम केशवाय नम:, ओम नारायणाय नम:, ओम माधवाय नम: मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.
- आचमन के बाद अंगूठे के मूल भाग से अपने होठों को दो बार पोंछ लें. फिर ओम हृषीकेशाय नम: मंत्र का उच्चारण करके हाथ धो लें. उसके बाद अंगूठे से नाक, आंख और कान को स्पर्श करें.
- आप बैठकर आचमन करने के अलावा अपने घुटने से ऊपर जल में खड़े होकर भी आचमन कर सकते हैं.
About the Author
.jpg?impolicy=website&width=52&height=52)
कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


