पुण्य कमाने का खास महीना आ रहा है! जानें आषाढ़ मास की शुरुआत, पूजा विधि और शुभ उपाय

पुण्य कमाने का खास महीना आ रहा है! जानें आषाढ़ मास की शुरुआत, पूजा विधि और शुभ उपाय

Ashadh Maas: आषाढ़ मास का नाम आते ही मानसून की पहली फुहार, मंदिरों की घंटियां और भक्ति से भरा माहौल आंखों के सामने आ जाता है. हिंदू धर्म में यह महीना सिर्फ मौसम के बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और पुण्य कमाने का भी खास समय माना जाता है. इसी महीने में कई बड़े धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं, जिनका इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं. भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा से लेकर गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी तक, आषाढ़ मास धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं कि साल 2026 में आषाढ़ मास कब से शुरू होगा, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दौरान कौन-से उपाय करने चाहिए, तो यह लेख आपके लिए है.

आषाढ़ मास 2026 कब से शुरू होगा?
हिंदू पंचांग के मुताबिक साल 2026 में आषाढ़ मास की शुरुआत 30 जून 2026, मंगलवार से होगी. यह पावन महीना 29 जुलाई 2026, बुधवार को गुरु पूर्णिमा के दिन समाप्त होगा. पूरे महीने के दौरान कई बड़े धार्मिक आयोजन और व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे, जिनका सनातन परंपरा में विशेष महत्व बताया गया है. आषाढ़ मास के दौरान 15 जुलाई 2026 से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी, जो 23 जुलाई तक चलेगी. इसके अलावा 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा निकलेगी. वहीं 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीनों के लिए चातुर्मास का आरंभ हो जाता है. 26 जुलाई 2026 से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाएगी.

क्यों खास माना जाता है आषाढ़ मास?
साधना और भक्ति का महीना आषाढ़ मास को आध्यात्मिक उन्नति का महीना कहा जाता है. वर्षा ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है. इसी वजह से ऋषि-मुनियों ने इस समय को साधना और आत्मचिंतन के लिए सबसे उपयुक्त माना. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किया गया जप, ध्यान, व्रत और दान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है. यही कारण है कि कई लोग इस दौरान विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का संकल्प लेते हैं.

गुरु पूर्णिमा का महत्व
आषाढ़ मास का समापन गुरु पूर्णिमा के साथ होता है. इस दिन गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान का प्रकाश देने वाला माना गया है. इसलिए इस दिन अपने गुरु, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का सम्मान करना शुभ माना जाता है.

आषाढ़ मास में किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास मुख्य रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है. इसके साथ ही सूर्य देव, मां दुर्गा और गुरु की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. कई जगहों पर जल देवता की पूजा भी की जाती है. चूंकि यह महीना वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए जल तत्व को जीवनदायी शक्ति मानकर उसकी आराधना की जाती है.

आषाढ़ मास में करें ये खास पूजा उपाय

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का उपाय
आषाढ़ मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करने और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. सुबह और शाम भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है.

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सूर्य देव को अर्घ्य दें
सनातन परंपरा में सूर्य देव को विष्णु का ही स्वरूप माना गया है. इसलिए आषाढ़ मास में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और तांबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना लाभकारी माना जाता है. आज भी कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है. लोगों का मानना है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

मंगलवार को करें मंगल देव की पूजा
आषाढ़ मास में प्रत्येक मंगलवार को मंगल देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भूमिपुत्र मंगल की आराधना करने से साहस, आत्मबल और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. इस दिन लाल वस्त्र, लाल फूल और गुड़ का दान करना भी शुभ माना जाता है.

आषाढ़ मास में दान-पुण्य का महत्व
आषाढ़ मास में जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करना पुण्यदायी माना जाता है. गर्मी और बारिश के बीच के इस मौसम में पक्षियों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी शुभ कार्य माना गया है. कई लोग इस महीने में धार्मिक स्थलों पर सेवा कार्यों में हिस्सा लेते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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