परंपरा और तकनीक का मेल विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, शुभ-अशुभ समय के साथ देगी पूरी जानकारी
परंपरा-तकनीक का मेल विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, शुभ-अशुभ समय के साथ देगी जानकारी
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Vikramaditya Vedic Clock: काशी विश्वनाथ में अब विक्रमादित्य वैदिक घड़ी लगाई जाएगी. इस घड़ी में वैदिक समय, ग्रह-नक्षत्र, चंद्र स्थिति और विक्रम संवत की पूरी जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी. यह घड़ी भारतीय सभ्यता के वैज्ञानिक योगदान की याद भी दिलाती है. आइए जानते हैं विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के बारे में खास बातें और कैसे काम करती हैं यह घड़ी.
Vikramaditya Vedic Clock: आपने सेल और बिजली से चलने वाली कई घड़ियां तो देखी होंगी, लेकिन क्या कभी सूरज से चलने वाली प्राचीन वैदिक घड़ी के बारे में सुना है? जी हां, हम बात कर रहे हैं विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की, जो विद्या और आधुनिक तकनीक का अद्भुत मेल मानी जाती है. यह घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की स्थिति के आधार पर समय की गणना करने की पारंपरिक पद्धति को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करती है. साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया था. आइए जानते हैं विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के बारे में खास बातें और कैसे काम करती हैं यह घड़ी.

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की पहली वैदिक काल गणना पर आधारित विशेष घड़ी है. सूर्योदय की पहली किरण के साथ शुरू होकर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी पूरे दिन व मुहूर्तों में गिनती करती है. सिर्फ समय नहीं, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त भी बताती है. यह घड़ी केवल समय बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्राचीन भारतीय विज्ञान और ज्योतिष को जीवंत रखने का माध्यम भी है.

परंपरा, विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान का अद्भुत मेल उज्जैन के महाकाल मंदिर में स्थापित है. साथ ही हाल ही में वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी स्थापित की गई. यह घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की स्थिति के आधार पर समय की सटीक गणना करती है व स्थानीय समय के साथ-साथ कई वैदिक मानकों को भी ट्रैक करती है.
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यह 700 किलोग्राम वजनी अनोखी घड़ी प्राचीन विक्रम संवत और वैदिक काल गणना को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ती है. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की तकनीक को समझें तो यह आधुनिक घड़ियों की तरह 24 घंटे का चक्र नहीं अपनाती. बल्कि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को आधार बनाती है. एक दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है. यह घड़ी सूर्य की स्थिति, भारतीय पंचांग और खगोलीय गणनाओं पर आधारित है.

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी में कई जानकारी लगातार प्रदर्शित होती है, जिनमें तिथि, नक्षत्र (27 चंद्र नक्षत्र), योग, करण, शुभ-अशुभ समय, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, विक्रम संवत, मास के साथ ही अन्य वैदिक मानक भी शामिल है. दरअसल इस घड़ी का नाम राजा विक्रमादित्य पर रखा गया है क्योंकि विक्रम संवत की शुरुआत इन्ही राजा ने की थी. यही विक्रम संवत आज भी भारतीय पंचांग की नींव है.

साथ ही, यह भारतीय मानक समय (आईएसटी) और ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) भी दिखाती है. घड़ी में 7000 साल तक का डाटा स्टोर किया गया है और यह 189 भाषाओं में जानकारी दे सकती है. आधुनिक सेंसर और कंप्यूटिंग तकनीक का उपयोग करके यह सूर्य की गति, ग्रहों की स्थिति, चंद्रमा की कलाओं, सूर्य-चंद्र ग्रहण और त्योहारों की जानकारी भी प्रदान करती है.


