चमत्कारी है यह श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, पुरुषोत्तम मास में सिर्फ दर्शन मात्र से दूर ह
पुरुषोत्तम मास में इस मंदिर में दर्शन मात्र से दूर हो जाती है कंगाली और दुख
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आंध्र प्रदेश की पावन धरती पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को भक्तों के बीच चमत्कारी धाम माना जाता है. मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में यहां श्रद्धा से किए गए दर्शन मात्र से कंगाली, आर्थिक तंगी और जीवन के बड़े से बड़े दुख दूर हो जाते हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में नतमस्तक होते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं…
आज पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी तिथि का व्रत किया जा रहा है. एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना का सबसे पवित्र और खास समय माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा और दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. ऐसे में आपको छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित नारायण के भव्य मंदिर के बारे में बताते हैं, जो दक्षिण भारतीय और ओडिशा शैली में निर्मित है. मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास की एकादशी के दिन इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और हर इच्छा पूरी होती है. आइए जानते हैं भगवान नारायण के इस मंदिर के बारे में…
श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर
श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण दूर-दूर से आने वाले भक्तों को आकर्षित करता है. जगदलपुर के मोतीतालाब पारा में स्थित यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. मंदिर का निर्माण आंध्र एसोसिएशन के सदस्यों के प्रयासों से किया गया है. इसका उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन को मजबूत करना भी है.
सभी परेशानियां हो जाती हैं खत्म
मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों को एक अलग तरह की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. विशाल प्रार्थना हॉल में श्रद्धालु भगवान के सामने बैठकर पूजा करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. पुरुषोत्तम मास के दौरान यहां भक्तों की संख्या और भी बढ़ जाती है. लोगों का विश्वास है कि भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन मात्र से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनोखी वास्तुकला है. मंदिर का विशाल गोपुरम, यानी मुख्य द्वार, बेहद आकर्षक दिखाई देता है. इस पर देवी-देवताओं की सुंदर आकृतियां और बारीक नक्काशी की गई है.
बड़ी संख्या में आते हैं भक्त
दक्षिण भारतीय मंदिर शैली और ओडिशा की पारंपरिक स्थापत्य कला का ऐसा सुंदर मेल बहुत कम जगहों पर देखने को मिलता है. यही कारण है कि यह मंदिर धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ वास्तुकला प्रेमियों के लिए भी खास है. मंदिर परिसर में नियमित रूप से आरती, भजन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. त्योहारों के समय यहां का वातावरण और भी भव्य हो जाता है. खासकर ब्रह्मोत्सव और वैकुंठ एकादशी, अनंत चतुर्दशी जैसे अवसरों पर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइट्स और फूलों से सजाया जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन आयोजनों में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
मंदिर के आसपास काफी चीजें
मंदिर के आसपास का वातावरण भी बेहद मनमोहक है. यहां बने सुंदर बगीचे और फव्वारे लोगों को सुकून का एहसास कराते हैं. श्रद्धालु पूजा के बाद मंदिर परिसर में समय बिताते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं. जगदलपुर का यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. मंदिर के आसपास स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुएं भी लोगों को आकर्षित करती हैं. यहां लकड़ी की नक्काशी, धातु कला और हाथ से बने वस्त्र आसानी से मिल जाते हैं. इसके अलावा, स्थानीय बाजारों में काली मिर्च, दालचीनी और लौंग जैसे मसालों की खुशबू भी लोगों को अपनी ओर खींचती है. आदिवासी आभूषण और पारंपरिक कलाकृतियां इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखाती हैं.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


