घर में आखिर क्यों नहीं रखनी चाहिए राधा-कृष्ण की ऐसी तस्वीर, अग्नि पुराण के 43वें अध्याय से

घर में आखिर क्यों नहीं रखनी चाहिए राधा-कृष्ण की ऐसी तस्वीर, अग्नि पुराण के 43वें अध्याय से

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क्या आपके घर में राधा-कृष्ण की ऐसी तस्वीर है जो उनके विवाह को दर्शाती है? अगर हां, तो आपको यह जानना जरूरी है कि अग्नि पुराण के 43वें अध्याय में ऐसी तस्वीरों को घर में न रखने की सलाह क्यों दी गई है. यह लेख बताएगा कि राधा-कृष्ण की किस प्रकार की तस्वीर घर में नहीं रखनी चाहिए और इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं क्या हैं. जानिए इस विषय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी.

Temple Vastu Tips: सनातन धर्म में देवी-देवताओं की मूर्ति या चित्र के रूप में पूजा करने की परंपरा बहुत पुरानी है. अधिकांश लोग अपने घरों में मंदिर बनवाते हैं, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करते हैं और नियमित पूजा करते हैं. इससे घर में ना केवल सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है बल्कि कई तरह के दोष भी दूर होते हैं. हालांकि, धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में सभी प्रकार की मूर्तियां या चित्र रखना भी उचित नहीं है. देवी-देवताओं की कुछ मूर्तियां या तस्वीरें घर में में रखने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मान्यता है कि इस तरह की मूर्तियां या तस्वीर रखने से कई तरह के दोष उत्पन्न होते हैं और परिवार में लड़ाई-झगड़ा शुरू हो जाता है. साथ ही परिवार के सदस्यों की तरक्की भी रूक जाती है.

इन मुद्दों का विवरण वास्तु शास्त्र के साथ-साथ गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण और नारद संहिता जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. उदाहरण के लिए, अग्नि पुराण के अध्याय 43 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टूटी हुई या क्षतिग्रस्त मूर्तियों को घर में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि वे दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं. अगर कोई मूर्ति टूट जाती है या किसी देवता का चित्र फट जाता है, तो उसे तुरंत किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए. इसके अतिरिक्त, कुछ प्रकार की मूर्तियों को घर के मंदिर में स्थापित करने से वर्जित माना गया है.

महाकाली की भयंकर मूर्ति – घर के मंदिर में देवी काली के भयंकर रूप की मूर्ति रखना उचित नहीं माना जाता है. इस रूप को अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक प्रथाओं से जुड़ा माना जाता है. ऐसी मूर्तियां घर के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं. वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए देवी के केवल सौम्य और शांत रूप को ही स्थापित करना चाहिए.

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काल भैरव की मूर्ति – काल भैरव को भगवान शिव का भयंकर रूप माना जाता है, जिनकी विशेष मंत्रों और अनुष्ठानों के साथ पूजा की जाती है. उनकी मूर्ति को घर में उचित पूजा के बिना रखने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. इसी तरह भगवान शिव का नटराज रूप, जो तांडव मुद्रा में चित्रित है, भी अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह भयंकर ऊर्जा का प्रतीक है.

शनि देव की मूर्ति – शनि देव एक न्यायप्रिय व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी दृष्टि क्रूर मानी जाती है. इसलिए शनि देव की मूर्ति को घर के मंदिर में नहीं रखना चाहिए. माना जाता है कि परिवार के सदस्यों पर उनकी सीधी दृष्टि जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं को जन्म दे सकती है.

शनि देव की मूर्ति – शनि देव एक न्यायप्रिय व्यक्ति हैं, लेकिन उनकी दृष्टि क्रूर मानी जाती है. इसलिए शनि देव की मूर्ति को घर के मंदिर में नहीं रखना चाहिए. माना जाता है कि परिवार के सदस्यों पर उनकी सीधी दृष्टि जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं को जन्म दे सकती है.

राधा और कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियां – राधा और कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियां या तस्वीर घर के मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. उनके प्रेम और एकता का प्रतीकवाद तभी प्रभावी होता है, जब वे एक साथ हों. उनकी मूर्तियों को अलग-अलग रखने से घर में तनाव, कलह और असहमति बढ़ सकती है. इसका उल्लेख नारद संहिता और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है.

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