गोमती किनारे शिव का अद्भुत धाम, यहां के पानी में डूब जाता है बेलपत्र और लौट आता है फल
गोमती किनारे शिव का अद्भुत धाम, यहां के पानी में डूब जाता है बेलपत्र और…
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देवों के देव महादेव के कई मंदिरों के बारे में सुना होगा कि वह मंदिर बेहद रहस्यमयी है लेकिन यहां भगवान शिव का एक कुंड है, जहां पानी में बेलपत्र डूब जाता है. कुण्ड के आसपास का क्षेत्र पारंपरिक आस्था और लोकविश्वास का केंद्र माना जाता है. धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा, हवन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं. आइए जानते हैं श्री रूद्रा कुंड महादेव मंदिर से संबंधित रहस्य के बारे में…
गोमती नदी के किनारे पर बसा रुद्रावर्त कुण्ड एक ऐसा स्थान है, जो पहली नजर में बिल्कुल साधारण सा लगता है लेकिन इसके अंदर एक अद्भुत शक्ति छिपी हुई है. कहा जाता है कि इस कुंड के अंदर देवाधिदेव महादेव खुद शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. कहते हैं कि रुद्रावर्त कुण्ड में जब कोई भक्त सच्चे मन से भगवान शिव का नाम लेकर बेलपत्र अर्पित करता है, तो वह बेलपत्र पानी में डूब जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पूजा अर्चना करने मात्र से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और त्वचा से संबंधित सभी समस्याओं से मुक्ति भी मिलती है. आइए जानते हैं श्री रूद्रा कुंड महादेव मंदिर के बारे में खास बातें…
यहां पानी में डूब जाता है बेलपत्र
अब यह बात सुनने में जितनी साधारण लगती है, उतनी है नहीं. क्योंकि आमतौर पर बेलपत्र पानी में तैरता है, डूबता नहीं. लेकिन यहां, इस कुण्ड में जैसे ही बेलपत्र अर्पण किया जाता है, वह धीरे-धीरे नीचे चला जाता है. मानो सीधे शिवलिंग तक पहुंच रहा हो. भक्त यहां फल भी अर्पित करते हैं. कहा जाता है कि कुछ फल जल में समा जाते हैं, जबकि अन्य प्रसाद के रूप में वापस ऊपर आ जाते हैं.
स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान शिवजी
स्थानीय लोगों की मानें तो इस कुण्ड में भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. इसलिए जो भी अर्पण किया जाता है, वह सीधे उन्हें प्राप्त होता है. एक और दिलचस्प बात यह भी है कि अगर बेलपत्र जरा सा भी टूटा या खंडित हो, तो वह नहीं डूबता. सिर्फ बेलपत्र ही नहीं, यहां एक और अनोखी बात देखने को मिलती है. जब भक्त दूध चढ़ाते हैं, तो वह पानी में फैलने के बजाय एक सीधी धारा बनाकर नीचे की ओर जाता हुआ दिखाई देता है. आमतौर पर पानी में डाला गया दूध तुरंत फैल जाता है, लेकिन यहां यह दृश्य लोगों को हैरान कर देता है. ऐसा लगता है जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे एक दिशा दे रही हो.
चमत्कार और रहस्य से भरा है रुद्रावर्त कुण्ड
मान्यता है कि अगर आप पांच फल अर्पित करते हैं, तो कुछ देर बाद उनमें से एक या दो फल वापस ऊपर आ जाते हैं. इन्हें प्रसाद के रूप में लिया जाता है. यह दृश्य देखने के बाद कई लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं आखिर यह कैसे होता है? कुछ लोग इसे आस्था का चमत्कार मानते हैं, तो कुछ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण खोजने की कोशिश करते हैं. नैमिषारण्य के पास स्थित यह पवित्र स्थल सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि एक अनोखा अनुभव भी देता है. यहां आने वाले लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं करते, बल्कि इस रहस्य को अपनी आंखों से देखने की इच्छा भी लेकर आते हैं.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें


