गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा, जानें महत्व और मंत्र, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त

गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा, जानें महत्व और मंत्र, नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त

Gupt Navratri 3rd Day Puja: माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि साधना, तंत्र और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष पर्व मानी जाती है. 21 जनवरी दिन बुधवार को गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा-अर्चना की जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि चल है, जो 22 जनवरी की सुबह 2 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगी. गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा-अर्चना की जाती है. उन्हें दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है और यह दिन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी होता है. आइए जानते हैं गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा का महत्व, मंत्र, शुभ मुहूर्त और योग…

मां त्रिपुर सुंदरी तीन लोक की स्वामी
माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्रि साधना, तंत्र और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष पर्व मानी जाती है. बुधवार को गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां त्रिपुर सुंदरी का पूजन किया जाएगा. मां त्रिपुर सुंदरी को षोडशी, ललिता और राजराजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार वे तीनों लोकों भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में सबसे सुंदर और शक्तिशाली देवी हैं. मां त्रिपुर सुंदरी सौंदर्य, करुणा, प्रेम और पूर्णता की प्रतीक मानी जाती हैं.

माता का पूजा का लाभ
मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का तंत्र साधना में विशेष महत्व है. इस दिन गुप्त रूप से मंत्र जाप, यंत्र पूजन और ध्यान करने से साधक की साधना शीघ्र सिद्ध होती है. श्री यंत्र को मां त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप माना जाता है, जिसकी उपासना से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना से वैवाहिक जीवन में मधुरता, प्रेम में सफलता, सौंदर्य और आकर्षण की वृद्धि होती है. साथ ही साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर उन्नति का आशीर्वाद मिलता है.

चंद्रमा कुंभ राशि में
दृक पंचांग के अनुसार किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है. कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश, मुंडन या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पंचक और राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए. 21 जनवरी को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं करना चाहिए. नक्षत्र की बात करें तो धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र शुरू हो जाएगा. चंद्रमा कुंभ राशि में संचरण करेगा. सूर्योदय 7 बजकर 14 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 51 मिनट पर होगा.

21 जनवरी के शुभ मुहूर्त और योग
21 जनवरी के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट पर विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 1 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक है. वहीं, रवि योग दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से अगले दिन सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा.

इस तरह करें माता की पूजा
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के गुप्त स्वरूप की साधना की जाती है. तृतीया तिथि पर देवी के तीसरे रूप मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का विशेष महत्व है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर मां दुर्गा की विधिवत पूजा करें, मंत्र जाप करें और श्रद्धा-भक्ति से प्रसाद अर्पित करें. इसके साथ ही जप का विशेष महत्व है. इस दिन मां को लाल या गुलाबी वस्त्र, पुष्प, कुमकुम, अक्षत और मिष्ठान्न अर्पित किए जाते हैं. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है. श्रद्धालु मौन साधना और ध्यान के माध्यम से मां की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं.

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