क्या सावन में रात को शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ है? जानें शास्त्रों का स्पष्ट नियम और पूजा क
क्या सावन में रात को शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ है? जानें शास्त्रों का नियम
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Jalabhishek At Night Sawan: सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है, लेकिन क्या रात के समय ऐसा करना शुभ होता है? यह सवाल कई भक्तों के मन में उठता है. शास्त्रों में पूजा के लिए कुछ विशेष नियम और विधान बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है. इस लेख में हम जानेंगे कि सावन में रात को शिवलिंग पर जल चढ़ाना कितना उचित है और शास्त्रों के अनुसार इस संबंध में क्या स्पष्ट नियम हैं. साथ ही, पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस पर भी प्रकाश डालेंगे.
Jalabhishek At Night Sawan: सावन मास आरंभ हो चुका है और 2 अगस्त को पहले सावन सोमवार का व्रत किया जाएगा. सावन मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु सोमवार के व्रत रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध एवं पंचामृत से अभिषेक कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं. कई भक्त कामकाजी व्यस्तताओं के कारण यह जानना चाहते हैं कि क्या रात के समय भी शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जा सकता है या नहीं. वैसे तो भगवान शिव की पूजा-जलाभिषेक सभी नियमों से परे मानी जाती है यानी शिवजी के जलाभिषेक में ज्यादा नियम नहीं होते हैं. जब आपका मन हो शिव पूजा करने का आप तब पूजन कर सकते हैं. अब हम वापस उसी सवाल पर आते हैं क्या शिवजी की जलाभिषेक रात के समय किया जाता है, आइए जानते हैं…
रात के समय जलाभिषेक किया जा सकता है या नहीं?
धर्मशास्त्रों और पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ऐसे देव हैं जिनकी पूजा दिन और रात्रि दोनों समय की जा सकती है. लेकिन फिर भी शिवजी की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे उत्तम माना गया है. अगर आपको रात्रि के समय पूजन करना है तो आप सावन शिवरात्रि के दिन रात के चार प्रहर की पूजा कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को अभिषेक प्रिय है. शिव पुराण और आगम परंपरा में शिवलिंग पर जल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है. हालांकि मंदिरों में स्थानीय परंपरा, आरती और शयन पूजा के समय के अनुसार जलाभिषेक की व्यवस्था अलग-अलग हो सकती है. ऐसे में मंदिर में जलाभिषेक करने से पहले वहां के नियमों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए.
रात्रि में इस तरह शिवजी का जलाभिषेक
रात्रि में पूजा करने से पहले स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें. शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें. इसके साथ बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं. बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि वह खंडित ना हो और उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रहे. पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप, शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.
रात्रि में जलाभिषेक करते समय रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा करते समय मन को शांत रखें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें और सात्विक आचरण का पालन करें. तामसिक भोजन, नशा और असत्य वचन से बचना भी शिव आराधना का महत्वपूर्ण नियम माना गया है. धर्माचार्यों के अनुसार, सावन में रात्रि के समय किया गया जलाभिषेक भी पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से किया जाए तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. हालांकि, अगर किसी विशेष मंदिर की परंपरा या समय-सीमा अलग हो, तो उसी का पालन करना उचित माना जाता है. सनातन परंपरा में श्रद्धा, पवित्रता और नियमपूर्वक की गई शिवभक्ति को ही सबसे अधिक महत्व दिया गया है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…
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